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वो अर्श का चरागाह है मैं उस के क़दमों की धुल हूँ ऐ ज़िंदगी गवाह रहना मैं गुलाम-ए-रसूल हूँ

संवाददाता – ठा. अनीष सिंह

इस्लाम धर्म के आखिरी पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन के मौके पर देशभर में ईद मिलाद उन-नबी मनाया जाता है। इस साल 30 नवंबर को ईद मिलाद उन-नबी मनाया गया ईद मिलाद उन-नबी को ईद-ए-मिलाद के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मोहम्मद (स.अ) का जन्म हुआ था।
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक इस्लाम के तीसरे महीने यानी रबी-अल-अव्वल की 12वीं तारीख को 571 ई में पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ था। साथ ही इसी रबी-उल-अव्वल के 12वें दिन ही पैगम्बर मुहम्मद की मृत्यु भी हुई थी।
पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.अ) का पूरा नाम मोहम्मद इब्न अब्दुल्लाह इब्न अब्दुल मुत्तलिब था। उनका जन्म मक्का शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम अब्दुल्लाह और माता का नाम बीबी अमिना था। कहा जाता है कि 610 ईं. में मक्का के पास हीरा नाम की गुफा में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म की पवित्र किताब कुरान की शिक्षाओं का उपदेश दिया।
ऐसी मान्यता है कि उनको स्वयं अल्लाह ने फरिश्ते जिब्रईल के द्वारा कुरान का संदेश दिया था। मुस्लिम धर्म के लोग इनके लिए हमेशा परम आदर भाव रखते हैं। मुसलमानों के लिए ये बड़ा त्यौहार हैं। लेकिन इस त्यौहार को लेकर शिया और सुन्नी के अलग-अलग मत है।
ईद मिलाद उन-नबी पर शिया और सुन्नी में मतभेद
ज्यादातर सुन्नी मुस्लिम्सों द्वारा रबी के 12वें दिन ईद-ए-मिलाद मनाई जाती है। वहीं, शिया मुस्लिम इसे रबी के 17वें दिन मनाते हैं। शिया समुदाय पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्म की खुशी में इसे मनाता है और वहीं सुन्नी समुदाय के कुछ फिरकों का मानना है कि ये दिन उनकी मृत्यु का दिन है, इस कारण वो पूरे माह शोक मनाते हैं।
हालांकि सुन्नियों में खासतौर पर पैगंबर के जन्मदिन का जश्न बरेलवी समुदाय के लोगों द्वारा मनाया जाता है। बता दें कि पैगंबर हजरत मोहम्मद अल्लाह के आखिरी नबी और सबसे अफजल नबी हैं, जिनको खुद अल्लाह ने फरिश्ते जिब्रईल द्वारा कुरान का संदेश दिया
हजरत मोहम्मद का कहना है कि सबसे अच्छा आदमी वह है जिससे मानवता की भलाई होती है। साथ ही उन्होंने कहा था कि जो ज्ञान का आदर करता है, वह मेरा आदर करता है। ज्ञान को ढूंढने वाला अज्ञानियों के बीच वैसा ही है जैसे मुर्दों के बीच जिंदा।
हरजरत मोहम्मद (स.अ) ने कहा था कि भूखे को खाना दो, बीमार की देखभाल करो, अगर कोई अनुचित रूप से बंदी बनाया गया है तो उसे मुक्त करो, आफत के मारे प्रत्येक व्यक्ति की सहायता करो,
ईद मिलाद उन-नबी के दिन क्या करते हैं
आपको बता दें कि ईद मिलाद उन-नबी के दिन पैगंबर मोहम्मद के प्रतीकात्मक पैरों के निशान पर प्रार्थना की जाती है। मुस्लिम धर्म को मानने वाले लोग रात भर जागकर प्रार्थनाएं करते हैं। साथ ही इस दिन जुलूस भी निकाले जाते हैं।
ईद मिलाद उन-नबी के दिन पैगंबर मोहम्मद हजरत साहब को पढ़ा जाता है और उन्हें याद किया जाता है। इसके अलावा लोग मक्का मदीना और दरगाहों पर जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन जो कोई नबी को याद कर नियम से निभाता हैं। वो अल्लाह के प्यारों में शामिल हो जाता हैं। और उनपर अल्लाह की रहमत बरसती होती है।