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जयगुरुदेव

10/4/21

प्रेमियों! गुरु के मिशन में लग जाओ तो कलयुग में सतयुग आ जायेगा -बाबा उमाकान्त जी महाराज

पूरे विश्व में अध्यात्मवाद की रोशनी फैला रहे उज्जैन के पूज्य सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने प्रेमियों से आव्हान किया की प्रेमियों! गुरु के मिशन को, गुरु के नाम को और गुरु के काम को बढ़ाने में लगो। एक काम अगर यही कर ले गए तो गुरु महाराज कहा करते थे कि कलयुग में ही सतयुग आ जाएगा तो फिर कोई काम करने कि जरूरत ही नहीं रह जाएगी। आप समझो ‘सतयुग योगी सब विज्ञानी’ सतयुग में सब योगी विज्ञानी थे, उनको खाने-पहनने की कोई दिक्कत नहीं थी। एक बार किसान खेत को बोकर के चले आते थे। फिर कोई चिंता नहीं थी। समय पर बादल आते थे, बरस जाते थे। 90 दिन की, 60 दिन की फसल जो भी होती थी उतने दिनों के बाद जाते और काट कर के ले आते थे। एक बार बोते थे और 27 बार काटते थे। दुबारा बोने की भी जरूरत नहीं पड़ती थी। तो क्या था? भजन करते थे।

संविधान में बदलाव लाओ। अमन-चैन का बिगुल बजाओ।।

महाराज जी ने कहा आपको तो रोटी की, रोजी की न्याय की, शिक्षा कि, चिकित्सा कि जरूरत है। उसकी चिंता रहती है। यह सब चिंताएं खत्म हो जाएंगी, व्यवस्था सही हो जाएगी। भारत देश का संविधान कब बना था? बहुत पहले। तब समय-परिस्थिति दूसरी थी और अब यह पुराना हो गया है। समय-परिस्थिति वैसी नहीं रह गई। इस संविधान के द्वारा तो सुख शांति चैन मिल ही नहीं सकता है। यह लोग न्याय और सुरक्षा ही नहीं दे सकते। लोगों की नीयत को सही किया ही नहीं जा सकता है। इसलिए इसमें परिवर्तन आ जाएगा, बदलाव आ जाएगा, नियम बदल जाएगा। धरती का भी नियम बदलेगा और ऊपर से भी कुछ नियम में परिवर्तन होगा और सुख शांति मिल जाएगी।

इतिहास उठाकर देख लो, जब-जब युग परिवर्तन हुआ है, मरे बहुत हैं, प्रेमियो! बचने और बचाने की जरूरत है

महाराज जी ने कहा कि लेकिन यह बीच का समय खराब है। आप समझो, एक कुर्सी पर दो राजा नहीं बैठ सकते। एक गद्दी पर दो राजा नहीं बैठ सकते। एक कुर्सी पर दो अधिकारी एक साथ नहीं बैठ सकते हैं। एक हटेगा तब दूसरा बैठेगा। जब कलयुग जाएगा तभी तो सतयुग आएगा। तो ले जाएगा बहुत लोगों को, कलयुगी प्रेमियों को, जो कलयुग से ही प्रेम करते हैं, जो कलयुगी ही काम करते हैं। ले जाएगा उनको रगड़ता हुआ, घसीटता हुआ। बहुत मरेंगे। प्रेत योनि में चले जाते हैं। जो अकाल मृत्यु में, उम्र पूरी किए बिना जो मरते हैं वो प्रेत बनते हैं। बाल जितना बारीक मुंह होता हैं। खा ही नहीं पाते हैं। पेट नहीं भरता है तो परेशान रहते हैं और दूसरों को भी परेशान किए रहते हैं। बहुत समय तक रहना पड़ता है। आप समझो हजारों वर्षों तक प्रेत योनि में रहना पड़ता है। इस जीवात्मा को सजा देने के लिए ही प्रेत योनि मिलती है।

प्रेमियों ! लोगों को सतयुग देखने लायक बनाना है

महाराज जी ने प्रेमियों को आदेश दिया कि प्रेमियों! आप समझो अगर सब मर ही गए तो सतयुग देखेगा कौन? इसलिए सतयुग के लायक कुछ लोगों को तो बना ही लो। जिससे (वो भी) सतयुग देख ले। अगर सतयुग आ जाए इस धरती पर तो आप समझो कुछ करने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी। अब (सतयुग) आने को तो कभी भी आ जाए, चुटकी बजाने में आ जाए? लेकिन मरेंगे बहुत। तो बचाना है। देखना भी है अपने को और दिखाना भी है। आपके बहुत से घर के लोग सतयुग देखने के लायक नहीं बन पाए हैं। उनको तो कम से कम लायक बनाओ। वह तो देख ले नहीं तो वह चले जाएंगे उनके लिए आप तड़पते रहोगे तो ऐसा काम क्यों करने का?

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश मे कोई भी शराब,मांस,अंडा मछली की दुकान नहीं होगी

महाराज जी ने कहा कि अभी थोड़ा मौका है?आप मेहनत कर लो सतयुग तो आएगा उसको कोई रोक नहीं सकता है? लिंक पुराण के 40 वें अध्याय में लिखा हुआ है? आप समझो सूरसागर में लिखा हुआ है?जगन्नाथ पूरीया किताब में लिखा हुआ है। गुरु महाराज जी बराबर कहते रहे। संत वचन पलटे नहीं प्लांट जाए ब्रह्मांड, महात्माओं की बात कहीं गलत होती है।में कहता हूं?कि जिस दिन से देश में गउ हत्या बंद होगी उसी दिन से समझ लो कि सतयुग आने की किरण इस धरती पर पड़ जाएगी। उसी समय गऊ हत्या बंद हो जाएगी?गऊ हत्या ही नहीं देश में किसी भी पशु पक्षी की हत्या नहीं होगी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक अंडे की मछली की शराब की दुकान ही नहीं होगी आप यह समझो मेरे कहने से ही बहुत से लोगों ने बंद कर दिया? और दूसरा धंधा शुरू किया अच्छी आमदनी हो रही है? खूब बरकत मिल रही है?बता रहे हैं?

अजगर करे न चाकरी,पंछी करे न काम। दास मलूका कह गए सबके दाता राम।।

महाराज जी ने कहा कि आदमी,जब यह सोच लेता है? मैं नहीं करूंगा तो बच्चे तो भूखे मर जाएंगे। यह तो सोचता नहीं है ?कि जो पैदा होने के पहले मां के स्तन में दूध भरता है?परवरिश वह करता है? उसको तो भूल गए उसको याद रखो वह देगा? जो सारे संसार को देता है? आपको भी देगा?
जयगुरुदेव
परम सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज उज्जैन मध्य प्रदेश भारत