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जयगुरुदेव

01.04.2021, उज्जैन, म.प्र.

प्रेमियों ! जैसे हनुमानजी ने संकल्प बनाया कि राम काज कीन्हे बिना, मोहे कहां विश्राम – ऐसे आप भी संकल्प बनाओ -बाबा उमाकान्त जी महाराज

शाकाहार सदाचार नशामुक्ति की वैचारिक क्रांति लाने वाले उज्जैन के पूज्य सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 29 मार्च 2021 को होली के पावन अवसर पर भक्तों को संदेश दिया कि प्रेमियों आप संकल्प बनाओ कि जो समय निकल गया वह अब आने वाला नहीं है इसलिए अब जो बचा है उसे अच्छे काम में लगा दें, परमार्थ में लगा दें, भजन ध्यान सुमिरन करने लग जाएँ।

प्रेमियों ! आप लोग भजननंदियों की टीम बनाओ

आप लोग भजन ध्यान सुमिरन ना बने तो अपनी टीम बना लो। जैसे दुराचारी व्यभिचारी चोर-चकार, जो लोग ठगी करने वाले, लूटपाट करने वाले, चोरी-डकैती करने वाले हैं, यह लोग अपनी टीम बनाते हैं तो आप लोग अपनी भजनानंदियों की टीम क्यों नहीं बनाते हो? भजन करने वालों की टीम क्यों नहीं बनाते हो? जिसके अंदर इच्छा जग रही है उसे बुझने क्यों देते हो? आप लोग इकट्ठा करके बैठने लग जाओ। देखा-देखी गांव के और भी नामदानी बैठने लग जाएंगे। संकल्प क्यों नहीं बनाते हो कि हम अकेले बहुत कुछ कर सकते हैं। देखो! संकल्प ही तो हनुमान ने बनाया था। धूल चटा दिया रावण को। रावण घबरा गया एकदम से, भय आ गया उसके अंदर कि एक बंदर देखो पेड़ को ऐसे उखाड़-उखाड़ कर फेंकता चला जा रहा है। कहां से इसके अंदर ताकत आ गयी? जब उसका कोई उपाय नहीं चला तो उसने क्या भेजा? ब्रह्मास्त्र।

ब्रह्मास्त्र किसे कहते हैं?

ब्रह्मास्त्र किसे कहते हैं? जो रजोगुण, तमोगुण, सतोगुण को बस में रखता है, जो इंद्रियों का दमन करता है – उसको ब्रह्मास्त्र कहते है।
हनुमान ने संकल्प बनाया था – राम काज कीन्हे बिना, मोहे कहां विश्राम। राम का काम करे बिना मुझे विश्राम नहीं है। पहले तो रावण ने कहा मार दो लेकिन फिर लोगों ने कहा कि यह दूत हैं। आपको बताने आया है, कहने आया है कि मत टकराओ राम से, वह आप को परास्त कर देंगे।

पहले महापुरुष चेतावनी देते हैं। जब लोग नहीं मानते तो संहार करा देते हैं।

महाराज जी ने बताया कि पहले तो महापुरुष चेतावनी देते हैं, चेतावनी दिलवाते हैं। नहीं मानते हैं तब वह संहार कराते हैं। तो कहा कि इसके पूंछ में आग लगा दो। पूंछ क्या होता है? वह शरीर की रक्षा करती है, मक्खी मच्छर से। मुँह को, अन्य चीजों को पूंछ से साफ करते हैं। पूछ क्या होती है? यह रक्षक होती है।

पहले लोग मूंछ का एक बाल गिरवी रखकर लाख-पचास हज़ार ले आते थे

महाराज जी ने कहा कि पहले मूंछ का एक बाल निकाल कर के, गिरवी रख कर के लाख-पचास हजार ले आते थे। लोगों को विश्वास था मूंछ का बाल गिरवी रख दिया है तो मूंछ को बनाए रखने के लिए यह हमारा पैसा हड़प नहीं करेगा, हमारा पैसा वापस कर देगा, समय पर दे जाएगा। जैसे मूंछ के बाल की कीमत होती है ऐसे पूंछ की कीमत होती है। कहा की पूंछ बिना जब जाएगा, राम जब देखेंगे तो उनकी इज्जत खत्म हो जायेगी। हमसे लड़ाई नहीं लड़ेंगे। हनुमान जी ने शक्ति के द्वारा पूछ को बढ़ा लिया। तनिक भी नहीं घबराए कि आग लगाए जाने को है। उनको तो धुन सवार था कि राम काज कीन्हें बिना मोहे कहां विश्राम। जिस काम को के लिए हम को भेजा गया है, उस काम को हमको पूरा करना है।

गुरु के शरण में राम ने साढ़े बारह वर्षों तक रहकर रिद्धि-सिद्धि प्राप्त की थी, वही हनुमान में भर दिया

महराज जी ने बताया कि वही शक्ति जो उन्होंने भरा था, जो राम भगवान ने गुरु के शरण में साढे बारह बरस रह कर के सिद्धि-रिद्धि जो शक्ति प्राप्त किए थे, भर दिया था हनुमान जी में। लेकिन मनोबल अगर उनका डाउन होता तो न वह लंका गए होते। कैसे, किस तरह से उनका नाम होता?

प्रेमियों ! अच्छे काम के लिये मनोबल ऊँचा रखना चाहिये

महाराज जी ने कहा कि प्रेमियों ! अच्छे काम में मनोबल ऊंचा रखना चाहिए। कहा गया है कि – मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। पारब्रह्म को को पाइए मन ही के परतीत।। जिनको मिला मन ने साथ दिया, मन से संकल्प बनाया कि हमको पारब्रह्म को यानी परमात्मा को प्राप्त करना है तो प्रेमियों ऐसे संकल्प बनाना है आपको।

परम सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज, उज्जैन