प्रेमियों आपकी वज़ह से किसी जीव को कष्ट ना हो, यह संतमत बताता है -बाबा उमाकान्त जी महाराज

24.02.2021,झारखंड
प्रेमियों आपकी वज़ह से किसी जीव को कष्ट ना हो, यह संतमत बताता है -बाबा उमाकान्त जी महाराज
विश्व विख्यात परम संत बाबा उमाकांत जी महाराज ने 24 फरवरी 2021 को रामगढ़, झारखंड में सत्संग सुनाते हुए बताया कि प्रेमियों खान-पान सही रखो, चाल और चलन सही रखो। आपको जो गुरु महाराज जी ने बताया संतमत बतलाता है कि शाकाहारी रहो, जीवो पर दया करो। आपकी वजह से किसी को कष्ट ना हो तकलीफ ना हो संतमत यह बतलाता है ।

अगर बन्द हो मांसाहार तो बच जाए जीवों की जान

आप तो कुछ लोग कहोगे की भाई मैं तो जीवो को मारता नहीं हूं मैं तो खरीद करके लाता हूं, मांस खाता हूं। लेकिन आप अगर मांस खाना बंद कर दो तो जानवरों की रक्षा हो जाएगी। आप अगर लोगों को शाकाहारी बना लो प्रेमियों! आप अपने गांव के लोगों को शाकाहारी बना दो तो आप के आस-पास के ही बकरे बच जाएंगे, मुर्गे बच जाएंगे, उनकी जान बच जाएगी। अपनी मौत मरेंगे, आराम से मरेंगे। नहीं तो तड़पते हुए मरते हैं, छटपटाते हुए मरते हैं। आवाज उस मालिक से लगाते हैं। कहते हैं ना
मत सता गरीब को नहीं तो रो देगा,
जब सुनेगा उसका मालिक जड़ से खो देगा।

जीवो पर रहम करना ज़रूरी है।

कबीर साहब ने कहा ना
जो गल कांटे और का, अपना रहा कटाये।
साहब के दरबार में बदला कहीं ना जाए।।

आप ही समझो सजा से बच नहीं सकते हो।
कहा है
राम झरोखे बैठकर सब का मुजरा ले।
जा को जैसी चाकरी वाको वैसा दे।।

अच्छे का फल अच्छा मिलता है, बुरे का फल बुरा मिलता है। कभी-कभी देखो कहते हैं इतना सर में दर्द हो रहा है कि सर फटा जा रहा है। बदन में इतना दर्द है इसे तड़पन बहुत पैदा हो रही है। तो जब तड़पा-तड़पा के जीवों को मारोगे तो आपको तड़पन होगी कि नहीं होगी, बेचैनी होगी कि नहीं होगी। पिंजड़ा में जानवरों को बंद कर दिया, बकरा को बंद कर दिया, पंछियों को बंद कर दिया। चिड़ियों को जिन को मार कर खाते हैं पिंजरे के अंदर बंद कर देते हैं, खाने-पीने को नहीं देते हैं। पानी तक नहीं पिलाते हैं। जब उनको यही रहता है कि हमको इनको मार ही देना है जैसे ही ग्राहक आएगा तो काट देंगे। क्या दाना पानी देने का। अब वह जो भूखे होते हैं, जो तड़पते हैं, आपको उससे क्या पाप नहीं लगता है? आपको भी पाप लगेगा, आपको भी तड़पन पैदा होगी अंदर में, आप भी भूखे हो जाओगे, रहते हुए भी नहीं खा पाओगे। आप इस चीज को क्यों नहीं सोचते हो कि
कर्म प्रधान विश्व रची राखा।
जो जस करिए सो तस फल चाखा।।

यह कर्मों का फल देने वाला संसार है। जो जैसा करेगा वैसे उसको भरना पड़ेगा। उंगली आपकी कट जाए देखो कितना दर्द होता है, बहुत दर्द होता है। ऐसे यही जीवात्मा मुर्गा में भी, वैसा बकरा में भी, अन्य पक्षियों में भी है तो उसको काटोगे तो दर्द होगा कि नहीं होगा।