मनुष्य को अपनी आत्मा के कल्याण उद्धार के लिए ही शरीर दिया जाता है बाबा उमाकान्त जी महाराज

मनुष्य को अपनी आत्मा के कल्याण उद्धार के लिए ही शरीर दिया जाता है
बाबा उमाकान्त जी महाराज
आश्रम उज्जैन (म.प्र)भारत
विश्व विख्यात “परम् संत बाबा उमाकांत”जी महाराज जी कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर अपने जय गुरुदेव आश्रम से भक्तों को संदेश देते हुए बताया कि यह मनुष्य शरीर अनमोल है इसकी कोई कीमत नहीं है इसमें पूरे पांचों तत्व हैं इसमें खट्ट चक्र 6 चक्र हैं और किसी पशु-पक्षी में चक्र नहीं है बुद्धि नहीं है यह मनुष्य शरीर सबसे श्रेष्ठ है यह इसी काम के लिए मिलता है इस भोग के संसार में बहुत से भोगी जानवर हैं पशु हैं पक्षी हैं कीड़े मकोड़े हैं वह भी पैदा होते हैं इसी मृत्युलोक में ही रहते हैं भोगी इस संसार में उनको भी भेजा जाता है मनुष्य को अपने आत्मा के कल्याण के उद्धार के लिए ही मनुष्य दिया जाता है तो इसको पा करके अपना काम बना लो अपनी आत्मा का उद्धार कर लो किसी जानकार को “समरत गुरु को खोज लो “जो तुम्हारी आत्मा के कल्याण का रास्ता बता दे रास्ते पर चला दे और तुम्हारी मदद भी कर दे कमजोर पडो तो उनकी आप खोज कर लो और रास्ता ले करके अपना जीवन सार्थक कर लो नहीं तो यह “मिट्टी का खिलौना मिट्टी “में मिल जाएगा यह जो पांच तत्व हैं इसी तत्वों में विलीन हो जाएंगे जो इसके पोषण के लिए हैं इस शरीर की ताकत को खत्म कर देंगे धरती पर सबसे बलवान मनुष्य हैं चाहे राक्षसों में हो चाहे तो उनको मनुष्य शरीर में ही महापुरुषों ने मारा खत्म किया शेर कितना ताकतवर होता है हमला कर देता है बड़े-बड़े जानवरों के ऊपर जो बहुत ताकतवर आदमी से होते हैं आदमी से वह भी डरता है क्यों क्योंकि आदमी उसको भी मार देता है आप ही समझो मनुष्य शरीर पाने का अपना उद्देश्य समझो प्रेमियों पूरा कर लो जिन को नामदान नहीं मिला नाम दान ले करके जिससे सारा संसार बना अंड पिंड ब्रह्मांड बने इसी से सब जुड़े हुए हैं जिसके आधारित हैं उस नाम को ले लो उस”शब्द की डोर” को पकड़ कर के निकल चलो नहीं तो एक एक, एक मिनट का समय आपका निकला जा रहा है जो समय जीवन में आपको कुछ करने के लिये आपको मिला है वह निकला जा रहा है