जन अधिकार पार्टी एवं भागीदारी संकल्प मोर्चा द्वारा जिला अधिकारी द्वारा राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को कार्यकर्ताओं द्वारा सौंपा गया ज्ञापन

केंद्र व प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों डीजल पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी को वापस लेने एवं भाजपा सरकार द्वारा पिछड़े वर्ग का आरक्षण समाप्त किए जाने के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करते हुए जन अधिकार पार्टी के जिला प्रभारी अनिल कुशवाहा, जिला अध्यक्ष शिवभवन कुशवाहा, युवा जिलाध्यक्ष मिथलेश मौर्य,भूपेंद्र प्रजापति,बुधराज प्रजापति, जिला मीडिया सचिव लक्ष्मीकांत कुशवाहा बृजेश मौर्य,शिवमूरत, अशोक पाल, शिवा जी,अरविन्द सोनकर,मीडिया प्रभारी कमलेश मौर्य,जिला सक्रिय कार्यकर्ता सुनील कुशवाहा,मण्डल सचिव करन सिंह,राजकुमार मौर्य,अयोध्या पाल,बॉबीराज, दीपू मौर्य,व जन अधिकार पार्टी के तमाम कार्यकर्ता गण उपस्थित रहे।
जन अधिकार पार्टी एवं भागीदारी संकल्प मोर्चा की प्रमुख मांगे
कोरोना मृतक आश्रित परिवार को कम से कम 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाए। यदि मृतक आश्रित परिवार के पास खुद का निजी मकान न होने पर उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान भी दिया जाए, पेट्रोल डीजल की बढ़ी कीमतें तत्काल वापस ली जाएं,पिछड़ों दलितों अल्पसंख्यकों की हत्या एवं उत्पीड़न को तत्काल रोका जाए, मजदूरों को व्यवस्थित होने के लिए उन्हें कम से कम ₹15000 एकमुश्त दिए जाएं और ₹7500 अगले 1 वर्ष तक प्रतिमाह दिए जाएं,अन्य वर्गों की तरह पिछड़े वर्ग के छात्रों को भी छात्रवृत्ति प्रदान की जाए,पूरे देश में शिक्षा का पाठ्यक्रम एक समान किया जाए और बेरोजगार नव युवकों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए, किसानों को खाद बीज एवं कीटनाशक दवाएं उचित मूल्य पर उपलब्ध कराई जाएं और सिंचाई व्यवस्था मुफ्त की जाए,आवारा पशुओं को बंद किया जाए जिससे किसानों की फसलों की सुरक्षा हो सके, छोटे व मझोले किसानों दुकानदारों व्यापारियों का कर्ज एवं बिजली का बिल माफ किया जाए, ग्रामीण अंचल में लगी 11 हजार की पुरानी तार,इन्सुलेटर, डिस आदि को बदला जाए। जिसके कारण आए दिन हो रहे हादसो से लोगों की जान बच सके, सरकार द्वारा पिछड़ों का आरक्षण मेडिकल सहित सभी क्षेत्रों में शून्य कर दिया गया है इसे तत्काल बहाल किया जाए, सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए सरकारी संपत्तियों का निजीकरण करना बन्द करें जो आम जनता के हित में नहीं है, केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी क्षेत्रों की कंपनियों को उद्योगपतियों को कौड़ियों के दाम बेचा जा रहा है इसके राष्ट्र की अपूरणीय क्षति होगी इसे तत्काल रोका जाए। बीजेपी सरकार अन्य पार्टियों के शासन काल में बने महापुरषों के नाम से विद्यालय आदि के नामों को बदलना बंद करे। जैसा की भारत की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले राजकीय आश्रम पद्धति आवासीय विद्यालय कोइलहा कौशाम्बी का नाम चेंज किया गया। हम सरकार के ऐसे गलत कार्यों एवं नीतियों का पुरजोर विरोध करते हैं जो की महिलाओं में शिक्षा की अलख जगाने वाली भारत की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले जी के नाम का अपमान है।अतः सरकार से हम निवेदन करते हैं की विद्यालय का नाम शिक्षा की देवी माता सावित्री बाई फुले जी के नाम से पुनः रक्खा जाए।