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जय गुरु देव

21.09.2021
प्रेस नोट
जयपुर, राजस्थान

नौजवानों अगर खाने-पीने और मौज-मस्ती में समय निकाल दिया तो कोई आपका नाम लेवा नही रहेगा इसलिए चरित्रवान और देश भक्त बनो

गुरु भक्ति, देश भक्ति करने तथा युवाओं को चरित्रवान बनने की शिक्षा देने वाले वर्तमान के पूरे सन्त सतगुरु बाबा उमाकांत जी महाराज ने 22 जुलाई 2013 गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में जयपुर, राजस्थान में दिए संदेश में बताया कि आप सब लोग अपनी-अपनी जगह पर आ जाओ, अपने-अपने पावर में आ जाओ तो बहुत जल्दी काम हो जाएगा। देखो जब हिंदुस्तान में अंग्रेज आए थे तो राज्य करने की नीयत से नहीं बल्कि व्यापार करने के लिए आये थे। लेकिन यहां की कमियों को उन्होंने पकड़ा और उन कमियों के आधार पर अंग्रेजों ने राज किया। हिंदुस्तान में वो राजा बन गए और हटने का नाम नहीं ले रहे थे।

सच्ची आवाज़ उस मालिक तक पहुँच जाती है फिर वो मदद करता है

आंदोलन तो शुरू किया था गांधी जी ने लेकिन उस वक्त पर लोग डरते थे कि अगर गांधी टोपी लगा कर के किसी के दरवाजे पर कोई पहुंच जाता तो खड़ा नहीं होने देते थे। कहते थे अंग्रेज साहब नाराज हो जाएगा, हट जाओ। लेकिन उनका मनोबल ऊंचा था। जंगलों में जाते थे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आवाज लगाते थे आजाद करा लेंगे, आजाद करा लेंगे। तो देश आजाद हुआ। उस मालिक तक आवाज पहुंची तो देश आजाद हो गया। लेकिन उसमें अहम भूमिका किसकी रही? सुभाष चंद्र बोस की। अहम भूमिका में वह जापान का लड़का भी था।

जापान के नौजवान युवा ने भारत के लिए कुर्बानी दी थी

ऐ नौजवानों! जब सुभाष जापान पहुंचे, उन्होंने एक ओजस्वी भाषण दिया। भारतीय संस्कृति खत्म होती जा रही है। इन अंग्रेजों ने खानपान बदल दिया, पहनावा बदल दिया, आचार-विचार आहार बदल दिया। अब हमारा देश इस समय पर स्वतंत्र नहीं रह गया। हमारे देश की आजादी खतरे में पड़ गई। अगर कोई नौजवान कुर्बानी देने के लिए तैयार हो जाए तो मेरा देश आजाद हो सकता है। वहीं पर एक नौजवान बैठा हुआ था। बोला है ऐ सुभाष! अपने मातृभूमि, अपने देश के लिए तो हर नौजवान कुर्बान होता है, मरता-मिटता है। चल मैं तेरे देश के काम आऊंगा। सुभाष ने उससे पूछा कि बता तेरे घर में और कौन-कौन लोग हैं। उसने कहा केवल एक बूढ़ी मां है उसके अलावा मेरे घर में और कोई नहीं है। सुभाष ने कहा तेरी बूढ़ी मां तेरे परमार्थ के राह में बाधक बनेगी। लड़का गया और मां से बोला की मां अगर तू न होती तो आज मैं भारत देश के काम आ गया होता। मां के हृदय को देखिए, मां के विचारों को देखिए। देवी जैसे विचार उसके। उसने कहा कि बेटा अपने देश के लिए तो हर कोई कुर्बान होता है, जा तू भारत देश के काम आ जाना। उठा ला तलवार और काट देती हूं मैं अपना गर्दन। ले जाकर के सुभाष के सामने रख देना और कह देना मेरी मां अब नहीं रही। अपनी ही गर्दन काट दिया उसकी मां ने। जब सुभाष के सामने रखा तब सुभाष ने कहा अब तू मेरे देश के काम आ जाएगा, तेरा इतिहास बनेगा। उसके शरीर में बम बांधकर के और ऐसे जहाज की चिमनी में डाला था जिसमें बहुत सारे असलहा हिंदुस्तान में आ रहे थे। अगर वह आ गए होते तो जन्म-जन्मांतर के लिए यह देश परतंत्र हो जाता, कभी आजाद नहीं हो सकता था। जब जहाज डूबा तब अंग्रेजों का कलेजा फटा और फिर वह हिंदुस्तान छोड़ करके चले गए। परिस्थितियां ऐसी बनी कि छोड़कर वह स्वतः ही चले गए।

भारत देश के नौजवानों! जापान के उस बलिदानी युवा के ऋणी हो आप

क्या आप उसके इतिहास को भूल सकते हो? कभी नहीं भूल सकते। आप ऋणी हो, कर्जदार हो उस नौजवान के जो जापान का नौजवान आपके देश के काम आया था। तो आप ऐसे खाने-पीने और मौज-मस्ती में और ऐसे लड़कियों के कुमारत्व को खत्म करने में अगर समय निकालोगे तो आपका कोई नाम लेवा नहीं रह जाएगा। इसलिए इस वक्त पर जरूरत है कि नौजवानों निकलो। एक तो सबसे पहली चीज यह है कि चरित्र आपका सही होना चाहिए।

Money is lost, nothing is lost.
Health is lost, something is lost.
Character is lost, everything is lost.

मनी इज लॉस्ट, नथिंग इस लॉस्ट।
हेल्थ इज लॉस्ट, समथिंग इस लास्ट।
बट करैक्टर इज लास्ट, एवरीथिंग इज लॉस्ट।

इस समय पर लोगों की जान खतरे में है, आप लोग चाहो तो बचा सकते हो

अगर करैक्टर नहीं है, चरित्र नहीं है आपका तो आप कुछ नहीं कर सकते हो। इसलिए चरित्रवान बनो। चरित्रवान बन करके ऐसे रास्ते पर चलो कि आपके पीछे-पीछे चलने वाले बहुत लोग हो जाए। आप पथ प्रदर्शक बन जाओ। अब जरूरत इस बात की है इस समय पर कि लोगों की जान खतरे में है। आप अगर चाहो तो लोगों को बचा सकते हो।