आगे ऐसी नई-नई बीमारियां आ रही हैं जो ज्यादातर मांसाहारियों को ही होंगी

जय गुरु देवमहासमुंद, छत्तीसगढ़*आगे ऐसी नई-नई बीमारियां आ रही हैं जो ज्यादातर मांसाहारियों को ही होंगी*जीव दया की शिक्षा देने वाले वर्तमान के पूरे सन्त सतगुरु बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 17 फरवरी 2021 को महासमुंद, छत्तीसगढ़ में सत्संग सुनाते हुये देश-दुनिया के लोगों से प्रार्थना कि की आप सभी लोग हमारी बात मान लीजिए और मांस मत खाइए। अगर नहीं मानोगे तो यह भी चेतावनी देता हूं कि आगे ऐसी नई-नई बीमारियां आ रही हैं जो ज्यादातर मांसाहारियों को ही होंगी। बहुत पहले मैं बोला करता था इस बात को कि ऐसी नई-नई बीमारियां आएंगी कि जिसकी दवा खोजते-खोजते ही बहुत से लोग मर जाएंगे।*कोरोना की दवा अभी सही रूप मे मिल ही नहीं पाई और करोड़ो की संख्या में लोग मर गये*महाराज जी ने बताया कि कोरोना की दवा, देखा जाए, अभी सच पूछो तो सही दवा अभी इसकी मिल ही नहीं पाई और करोड़ों की संख्या में लोग मर गए। सरकारी आंकड़े तो बहुत कम इकट्ठा हो पाते हैं। क्योंकि यहां गांव में कोई घटना घट गई तो यहां कौन पता लगाने आएगा? ऐसे ही बहुत मरे, पूरे विश्व में बहुत मरे।*कोरोना रोग तो कुदरत का ट्रेलर है, पिक्चर तो आगे चालू होगी* महाराज जी ने कहा कि यह तो आप समझो एक तरह से ट्रेलर है कुदरत का। ट्रेलर किसको कहते हैं? सब लोग नहीं जानते होंगे लेकिन इसमें जो सिनेमा देखने जाते हैं उनको मालूम होगा। सिनेमा में जब आधी पिक्चर खत्म हो जाती है, इंटरवल के समय, जो अगली पिक्चर आने वाली होती है उसका थोड़ा हिस्सा दिखाते हैं कि देखो! यह मारकाट हो रहा है, वैसा हो रहा है, ऐसा हो रहा है, इसको देख कर के फिर लोग आवें तो उसको कहते है ट्रेलर। यह तो अभी कुदरत का ट्रेलर है। पिक्चर तो अभी आगे चालू होगी।*मांस, मनुष्य का भोजन नहीं है*आप प्रेमियों शाकाहारी हो जाओ। मांस, मनुष्य का भोजन नहीं है। वह तो जानवरों को खाने के लिए जानवर ही बनाए गए। मान लो बहुत संख्या में पक्षी मर गए तो कौन उठा पाएगा? उनको तो जानवर खाने के लिए बनाए गए। जिनके दांत बड़े होते हैं, चाट करके पानी पीते हैं, आंखें गोल होती हैं, वे जानवर मांसाहारी होते हैं। घोड़ा, गाय, बैल आदि ये मांसाहारी नहीं होते हैं। इनके सामने आप मांस डाल दो तो सूंघ करके छोड़ देते हैं। आदमी बुद्धि विवेक से पूर्ण, देव दुर्लभ शरीर प्राप्त किया हुआ लेकिन कुछ नहीं सूंघता है, सब खाता चला जाता है। होटलों में जो लोग मांस खाते हैं वे किसी से पूछते हैं किस जानवर का लाए हो, बनाए हो? जब ज्यादा खपत बढ़ती है तब कुत्ते-बिल्ली का काट कर के, लाकर के, मिर्च मसाला डालकर के खिला देते हैं।*रोटी, अन्न देवता को मांस के टुकड़े के साथ खाते हैं*जिसको अन्न देवता कहते हैं, जिस देवता से प्रार्थना करते हैं कि हमको कमी ना होने पाए, उनको मांस से मिला करके खाते हैं। जो मांसाहारी जानवर हैं कुछ ना भूंजो, मिर्च मसाला न डालो, मांस डाल दो तो ऐसे ही खा जाते हैं। और आदमी के सामने मांस के टुकड़ों को लाकर रख दो कह दो खाओ तो नहीं खाता है।*जानवरों को जो मारता है, काटता है, उनके मांस को लाता है, पकाता है, खाता है, खिलाता है सबको बराबर पाप लगता है*यही मिर्च-मसाला आप जो मांस में डाल कर के, मछली में डाल करके, अंडा में डाल करके, पकाते हो और यही मसाला आप सब्जियों में डाल कर के बनाओ तो बढ़िया से बढ़िया स्वाद मिलेगा और मन भी प्रसन्नचित रहेगा, शरीर को फायदा भी करेगा और बुरे कर्मों से भी बचे रहोगे।देखो! जो जानवरों को मारता है, काटता है, पकाता है, खाता है, खिलाता है, लाता है – सबको बराबर पाप लगता है। कर्म उसके बुरे हो जाते है। बुरे कर्मों की सजा मिलती ही मिलती है। *कर्मों के चक्कर से कोई भी बच नहीं पाया है। जब से कर्मों का विधान बना, जितने भी लोग आये मनुष्य शरीर में, सबको कर्मों की सजा भोगनी पड़ी*धृतराष्ट्र ने कृष्ण से पूछा मैं अंधा क्यों हो गया? कृष्ण ने कहा तुम्हारे कर्म खराब थे। बोले एक सौ जन्मों का तो मुझे याद है। मैंने ऐसा कोई पाप नहीं किया जिससे मैं अंधा हो जाऊं। बोले और पिछले जन्म में जाकर देखो। पीछे जाकर देखा, 106 जन्म पहले, जो उनसे बुरा कर्म बन गया था उसके कारण वो अंधे हुये।*मनुष्य के कंधे पर दो दूत बैठें हैं, एक अच्छा और एक बुरा लिखता है। जो आप कर रहे सबका हिसाब होगा यमराज के दरबार में*आप यह मत सोचो कि हम जो कर रहे हैं, इसको कोई देख नहीं रहा है। जिसको कहते हो कोई सुन नहीं रहा, हमको देख नहीं पा रहा, जो हम कर रहे हैं कोई देख नहीं रहा – वह हिसाब करने वाला, मरने के बाद जो हिसाब करता है वो आपके सब अच्छे-बुरे कर्मों को निरंतर देख रहा है ।राम झरोखे बैठकर सबका मुजरा लेत।।जैसी जाकी चाकरी वैसा वाको देत।।*कर्मों की सजा से कोई बच नही पाया, कर्मों की सजा मिलती ही मिलती है*कर्मों की सजा मिल जाएगी। सजा कैसी? जैसे कैंसर हो गया, खुजली हो गयी, यह देखो इससे दूर रहो, घर के ही लोग ही छूत की बीमारी से दूर हो जाते हैं।जीव हत्या मत करो। किसी भी पशु-पक्षी का मांस मत खाओ।जयगुरुदेव*परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज आश्रम उज्जैनमध्य प्रदेश भारत*