शामली, सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं प्राइमरी स्कूल के अध्यापक, छोटे-छोटे बच्चों से कराई जा रही है स्कूल की सफाई

शामली, सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं प्राइमरी स्कूल के अध्यापक, छोटे-छोटे बच्चों से कराई जा रही है स्कूल की सफाई

योगी सरकार में भी सरकारी स्कूलों में अपनी मनमानी करते हैं अध्यापक

जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बच्चों की शिक्षा को लेकर बड़े दावे और वादे करती हैं वहीं उत्तर प्रदेश के जनपद शामली में अध्यापक योगी सरकार के आदेशों का पालन ना कर योगी सरकार को ठेंगा दिखा रहे हैं वही अध्यापकों के साथ अधिकारी भी भागीदार हैं

आपको बता दें कि पूरा मामला जनपद शामली के तहसील ऊन के गांव नाई नगला का है जहां कुछ अध्यापक उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के झाड़ू लगवाते हैं और स्कूल में खुद अध्यापक टाइम से नहीं पहुंच पाते अध्यापकों से पहले पहुंचकर बच्चों को स्कूल खोल कर झाड़ू लगानी पड़ती झाड़ू के साथ-साथ बच्चों को डैक्स व अध्यापकों की कुर्सी को भी साफ करना पड़ता है यह बात उस वक्त की है जब 2 अगस्त सुबह 8:00 बजे नाई नगला प्राथमिक विद्यालय में UFT NEWS 24 की टीम पहुंची तो स्कूल में देखा की स्कूल के बच्चे स्कूल में झाड़ू लगा रहे हैं और स्कूल में कोई अध्यापक भी मौजूद नहीं जबकि स्कूल का टाइम 8:00 बजे का है स्कूल के बच्चों ने बताया कि हम सभी बच्चे स्कूल में झाड़ू देते हैं स्कूल में दो अध्यापक एक शिक्षामित्र हैं सरिता व तरुण अध्यापक हैं और शैलेंद्र शिक्षामित्र है झाड़ू देने के लिए मैडम ने हमें बोल रखा है की सभी बच्चों को नंबर से झाड़ू लगानी हैं आज इसकी बारी है तो कल उसकी बारी है जब इस बात को प्राथमिकता से पत्रकारों ने दिखाने की कोशिश की तो पत्रकारों को भी अध्यापकों की तरफ से धमकी मिलने लगी कि तुम हमारे स्कूल में आते हो मैं तुम्हारी रिपोर्ट कर दूंगी वहीं शिक्षा मित्र शैलेंद्र ने भी धमकी देते हुए कहा कि आज इनका इलाज हो ही जाए क्या ऐसे अध्यापक पर भी कोई कार्यवाही कर सकती है योगी सरकार या फिर जो योगी सरकार के दावे और वादे अधिकारियों की तरह खोखले हो गए है जहां अधिकारी कार्रवाई करने का वादा कर उसको भूल जाते हैं
कई बार पत्रकारों ने भी स्कूल में झाड़ू देते हुए बच्चों की बात बीएसए शामली से भी पूछी गई तो उन्होंने कहां की इसमें क्या गलत है अगर स्कूल के बच्चे झाड़ू दे रहे हैं तो कोई बात गलत नहीं अब क्या बच्चे स्कूल में पढ़ने जाते हैं या झाड़ू देने अगर उनसे झाड़ू ही दिलवाने है तो सफाई कर्मी में भर्ती कर लिया जाए कम से कम मैं कुछ पैसे भी तो कमाने लग जाएंगे जो मां मां बाप पैसे की कमी की वजह से सरकारी स्कूल में बच्चों को भेजते हैं कम से कम उनका दो पैसे से घर तो चलेगा क्या अब ऐसे अध्यापकों पर कोई कार्यवाही हो सकती जहां एक तरफ योगी सरकार कार्यवाही को लेकर बड़े दावे करती है की योगी सरकार में किसी भी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी अगर किसी भी तरह की कोई लापरवाही सामने आए तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी क्या अब हो पाएगी ऐसे अध्यापकों पर कोई कार्यवाही या फिर ऐसे अधिकारियों पर जो इन अध्यापकों का सहयोग करते हैं स्कूल में एक अनोखी बात देखने को मिल स्कूल की दीवार पर अध्यापक कौन है दीवार घड़ी तो लगा रखी है पर किसलिए जब अध्यापक ही टाइम टेबल भूल गए तो उस दीवार घड़ी का फायदा क्या आखिर उस घड़ी के लिए पैसे बर्बाद क्यों जब स्कूल के अध्यापकों को ही टाइम टेबल का पालन ही नहीं करना तो वे स्कूल के बच्चों को क्या सिखाते होंगे इससे बच्चों को क्या शिक्षा मिलती होगी जहां स्कूल का समय 8:00 का है और अध्यापक 9:00 बजे आते हैं स्कूल के बच्चे को 8:00 बजे आकर साफ सफाई करते हैं और बैठ जाते हैं लेकिन जिन अध्यापकों को आकर स्कूल खोलना होता है वही एक घंटा लेट आते हैं और किसी दिन तो नहीं भी आती सवाल यह उठता है कि क्या अधिकारी ऐसे अध्यापकों पर कोई कार्यवाही कर पाएगी क्या स्कूल के बच्चों के हाथों में से छूट पाएगी झाड़ू जहां बच्चे स्कूल में पढ़ने लिखने जाते हैं वही स्कूल के अध्यापक उनको झाड़ू थमा देते हैं

यूपी फाइट टाइम्स के लिए शामली से उमर खान की रिपोर्ट

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