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जय गुरु देव

30.09.2021
प्रेस नोट
मुंबई, महाराष्ट्र

परमात्मा जिसको मिला जीते जी इसी मनुष्य शरीर से मिला, मरने के बाद न किसी को मिला न मिलेगा

मनुष्य को मुक्ति-मोक्ष का रास्ता नामदान देकर नर्क चौरासी और जन्म-मरण की पीड़ा से छुटकारा देने वाले अनामी प्रभू के साक्षात अवतार वर्तमान के पूरे संत सतगुरु बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 26 सितंबर 2021 को अपने कल्याण आश्रम, मुंबई में दिए व यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर प्रसारित संदेश में बताया कि गुरु महाराज बराबर कहा करते थे कि मिलेगा तो इसी मनुष्य शरीर में परमात्मा मिलेगा। मनुष्य शरीर छोड़ने के बाद न तो आज तक किसी को मिला है और न ही मिलेगा।

सतगुरु की खोज करके उनसे नामदान लेकर अपनी आत्मा को नर्क-चौरासी से बचाओ

यह मनुष्य शरीर जो आपको मिला है, किराये के मकान की तरह से है। एक दिन इसको खाली कर देना पड़ेगा और इसके अंदर बैठी परमात्मा की अंश, जीवात्मा नर्कों-चौरासी में चली जाएगी, नर्कों में मार खानी पड़ेगी।

नामदार लेकर सुमिरन, ध्यान, भजन करोगे और मेहनत ईमानदारी की कमाई करोगे तो गृहस्थी में भी मदद मिलेगी

जीवात्मा को जब परमात्मा तक पहुंचा दोगे तब तकलीफों से आराम पा जाएगी। वह रास्ता मैं आपको बताऊंगा। अगर इस रास्ते पर चलोगे, जो नामों को मैं बताऊंगा, उसको आप याद कर लोगे और सुमिरन, ध्यान, भजन जब आप करोगे तो आपके गृहस्थी के काम में भी मदद मिलेगी। अगर आप शाकाहारी, नशामुक्त होकर मेहनत-ईमानदारी की कमाई करोगे तो आपको तरक्की उसमें दिखाई पड़ेगी और आपके आत्मा का भी काम आसान हो जाएगा।

सुमिरन, ध्यान, भजन करोगे तो होंगे देवी-देवताओं के दर्शन

जब आप ध्यान लगाओगे, आंख बंद करोगे, ऊपरी लोको में जाओगे, स्वर्ग-बैकुंठ में जाओगे, साक्षात देवी-देवताओं का दर्शन करोगे तो खुश हो जाओगे। मस्ताना बाजा जो 24 घंटा बजता रहता है, जिसको कोई बजा नहीं रहा है, उसको जब आप सुनोगे तो मस्त हो जाओगे। अगर अपने बता दिया तो बंद कर देगा इसलिये किसी को बताना मत।

गुरु महाराज ने कहा इनको नामदान देना शुरू कर दो, भजन करने लगे, समय पूरा हो गया, शरीर छूट गया तो मनुष्य शरीर वापिस मिल जाएगा

गुरु महाराज जी के आदेश से नामदान देता हूं। नामदान देना दुनिया का सबसे कठिन काम है। पहले हमको नहीं मालूम था, अब पता चला गुरु का आदेश चाहे रैन में हो, चाहे बैन में हो, चाहे सैन में, पालन करना चाहिए। गुरु महाराज ने दुनिया संसार से जाने से पहले यह कहा था, पहले भी कहा था और बाद में फिर आदेश दिया, इनको नामदान देना शुरू कर दो। ये भजन अगर करने लगेंगे, समय पूरा हो गया, शरीर छूट गया, भजन नहीं कर पाए तब भी इनको मनुष्य शरीर मिल जाएगा क्योंकि मनुष्य शरीर का पाना ही बड़ा कठिन होता है।

नर्कों में सजा भोगने, करोड़ों जन्मों में भटकने के बाद अनमोल मानव तन मिला है, इसे व्यर्थ न गवाओं

करोड़ों जन्मों में भटकने के बाद, नर्कों में मार खाने के बाद, चौरासी में चक्कर काटने के बाद, पशु-पक्षी, कीड़ा-मकोड़ा, सांप-बिच्छू बनने के बाद यह अनमोल मनुष्य शरीर पाने का अवसर आपको मिला है। आपके आत्म कल्याण का रास्ता मैं आज आपको नामदान दूंगा।