कलम नहीं बिकनी चाहिए

मेरा परिचय:
मैं नीलू गुप्ता, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की निवासी हूं। पेशे से मैं एक शिक्षिका हूं। सिलीगुड़ी महाविद्यालय से स्नातक की परीक्षा पास की, इसमें मुझे स्वर्ण-पदक (फर्स्ट क्लास फर्स्ट) मिला था। नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी से हिंदी विषय में स्नातकोत्तर किया है, इसमें भी मुझे स्वर्ण – पदक (फर्स्ट क्लास फर्स्ट) की प्राप्ति हुई। महर्षि दयानन्द युनिवर्सिटी से मैंने बी. एड किया है। इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से पी. जी. डी. टी भी किया है। अध्ययन-काल से साहित्य में रुचि रखने के कारण कविताएं, कहानियां और आलोचना लिखने का शौक है। देश-भर की कई पत्र-पत्रिकाओं और समाचार पत्र में भी रचनाएं प्रकाशित होती रहती है। साथ ही साहित्यिक गतिविधियों में हिस्सेदारी के कारण कई सम्मान पत्र (कोरॉना वॉरियर, कोरॉना योद्धा, सृष्टि रक्षक, पितृ भक्त आदि) भी प्राप्त हुए है। काव्य-पाठ करना, काव्य-गोष्ठी में भाग लेना, नई-नई किताबें पढ़ना, मंच संचालन करना और सामाजिक कार्यों में भागीदारी प्रदर्शित करना मुझे पसंद है।
प्रकाशित काव्य-संग्रह:
१) एकल काव्य-संग्रह “लॉकडाउन दीवारों का विचारों का नहीं” (प्रथम खंड)
२) एकल काव्य-संग्रह “लॉकडाउन दीवारों का, विचारों का नहीं” (द्वितीय खंड)
३) साझा काव्य-संग्रह “बेटियां”
४) साझा काव्य-संग्रह “पिता का संघर्ष”

कलम नहीं बिकनी चाहिए
—- नीलू गुप्ता, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल

तलवार से भी अधिक ताकत
कलम में हमारे होती है,
योद्धाओं जैसा पराक्रम तो
सच्चे कलमकार में दिखती है।
शब्दों में होता है बल
समस्याओं को यह करता हल,
युद्ध के प्रभाव से कहीं अधिक
लेखन इसमें होता सक्षम।
कलम में होती ताकत ऐसी
बदल देती है यह दुनिया को,
समय के साथ हम देखेंगे
दुनिया में हुए परिवर्तन को।
कलम ही व्यक्तित्व का निर्माणकर्ता
चाहे तो किसी की छवि बिगाड़ता,
नाज़ुक होने के बावजूद भी यह
मानवता को बदलने की क्षमता रखता।
किसी के इशारों को मानकर
कलम कभी नहीं थमनी चाहिए,
सबकुछ भले बिक जाए यहां
पर कलम नहीं बिकनी चाहिए।