मातृभाषा का संरक्षण संवर्धन हमारी नैतिक जिम्मेदारी

सादड़ी पालीमातृभाषा का संरक्षण संवर्धन हमारी नैतिक जिम्मेदारी-मालीसादड़ी 20फरवरी। मातृभाषा संस्कृति एवं संस्कारों की भाषा है, मातृभाषा का संरक्षण एवं संवर्धन हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उक्त उद्गार प्रधानाचार्य विजय सिंह माली ने स्थानीय श्रीधनराज बदामिया राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय सादड़ी में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के पूर्व दिवस आयोजित विचार गोष्ठी में व्यक्त किए।माली ने अपने हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा में करने का आह्वान करते हुए कहा कि समय आगरा है कि हमारी मातृभाषा राजस्थानी को संवैधानिक दर्जा मिले। उन्होंने 21फरवरी 1952को बलिदान हुए मातृभाषा प्रेमियों को नमन किया।इस अवसर पर प्रकाश परमार, कन्हैयालाल,मधु गोस्वामी, महावीर प्रसाद,मनीषा ओझा, सरस्वती पालीवाल व सुशीला सोनी ने भी विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के भारतीय भाषा मंच द्वारा प्रकाशित जागरण पत्रक मां, मातृभूमि और मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं का विमोचन किया गया।अंत में उपस्थित स्टाफ वीरम राम चौधरी, रमेश सिंह राजपुरोहित,मोहन लाल, नरेंद्र कुमार बोहरा, ललित कुमार बोस, पुरुषोत्तम सहित बालिकाओं ने घर परिवार में मातृभाषा का उपयोग करने व मातृभाषा में हस्ताक्षर करने का संकल्प लिया।मंच संचालन प्रकाश शिशोदिया ने किया।उल्लेखनीय है कि 21फरवरी 1952को ढाका में बांग्ला भाषा को लेकर बलिदान हुए मातृभाषा प्रेमियों की स्मृति में यूनेस्को की पहल पर प्रतिवर्ष 21फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वावधान में इस दिन शैक्षणिक संस्थानों में विशेष आयोजन होते हैं।बयूरो रिपोर्ट ललित दवे