राजस्थानी भाषा को मिले संविधान की 8वीं अनुसुची में मान्यता – सांसद भागीरथ चौधरी

सादड़ी पाली

राजस्थानी भाषा को मिले संविधान की 8वीं अनुसुची में मान्यता – सांसद भागीरथ चौधरी

*बजट सत्र में आज शून्य काल के दौरान सांसद चौधरी ने मारवाड़ी भाषा में बोलकर उठाया मुद्दा
*गत 70 वर्षो से अपनी मायड़ भाषा को मान्यता हेतु प्रयत्नशील रहे हम राजस्थानी
अजमेर सांसद श्री भागीरथ चौधरी ने आज लोकसभा बजट सत्र में शून्यकाल के दौरान अविलम्बनीय लोक महत्व के बिन्दू पर चर्चा करते हुए सदन में राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूचि में सम्मिलित कर संवैधानिक मान्यता दिलाने की पुरजोर मांग रखी और सदन में बोला कि आज राजस्थान प्रदेश के 10 करोड़ लोग जो राजस्थानी भाषा केा अपने दैनिक बोलचाल में उपयोग करते है पिछले 70 वर्षाे से अपनी मायड़ भाषा राजस्थानी को संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए प्रयत्नशील है । जिसके लिए विधानसभा से लेकर राज्यसभा एवं लोकसभा में चर्चा भी हो चुकी है, समय समय पर धरने प्रदर्शन के साथ – साथ संगोष्ठियों का आयोजन भी किया जा चुका है, लेकिन राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण यह मुद्दा आज तक कागजों तक ही सीमित है। भारत के सबसे बडे प्रदेश में बोली जाने वाली इस भाषा का अपना समृद्ध इतिहास एवं साहित्य है। पडौसी देश नेपाल में तोे राजस्थानी भाषा में शपथ लेने की छुट भी है।हमारी राजस्थानी भाषा राजस्थान के आमजन की भाषा है इसे संवैधानिक मान्यता मिलने पर राष्ट्रभाषा हिन्दी और मजबूत होगी यह इसकी पूरक भाषा ही है, साथ ही इसकी लिपि भी देवनागरी है जो कि संविधान में मान्यता प्राप्त एकाधिक भाषाओं की लिपि भी है। एक और जहां विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा भी मान्यता प्राप्त होने से भी प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों में इस भाषा के साहित्य में एमफिल एवं पीएचडी शोध कार्य हो रहे है तो दूसरी ओर आकाशवाणी और विभिन्न चैनलों पर प्रतिदिन राजस्थानी भाषा में समाचार प्रकाशित होते है। देश मे हिन्दी भाषा को छोडकर सिर्फ 4 भाषाएं यथा बांग्ला, मराठी, तमिल एवं तेलगू ही ऐसी है जिनको बोलने वालों की संख्या राजस्थानी से अधिक है जबकि देश की बहुत कम बोली जाने वाली भाषाएं भी संविधान की आठवंी अनुसूची में सम्मिलित है। जिसके चलते राजस्थान प्रदेश के हम वाशिंदों को अपनी मायड़भाषा को संवैधानिक मान्यता नहीं दिए जाने से असंतोष हो रहा है।
अतः राजस्थान की कोटि कोटि जनता अपनी मातृभाषा को संवैधानिक मान्यता मिलने की चाह मंे इस पवित्र सदन और माननीय प्रधानमंत्री की ओर अपेक्षा से देख रही है सादर अनुरोध है कि राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कर करोड़ो राजस्थानियों को अपनी समृद्ध भाषा के विकास की राह प्रदान करावे ताकि राजस्थान प्रदेश की भावनाओं को उचित सम्मान मिल सके।

ललित दवे