धर्म एक ऐसा माध्यम है जो समाज को प्रेम सौहार्द के साथ जीना सिखाता है- संत रामदास

चित्रकूट राजापुर – कोविड -19 कोरोना वायरस के मद्दे नजर गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि राजापुर के तुलसी जन्मकुटीर में बड़े ही सादगी व पूरे सोशल डिस्टेन्स के साथ तुलसी जयन्ती महोत्सव से पूर्व श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ चल रहा है। 27 जुलाई को तुलसी जयन्ती में रूद्राभिषेक व विधि – विधान से पूजा – अर्चना की जाएगी।
वंशीवट मथुरा वृन्दावन धाम के सन्त रामदास जी महाराज ने ढोल – नगाड़ों की थाप से रामायण जी की आरती के साथ नवान्हपारायण के चौथे मानस की चौपाइयों में माँ पार्वती व भगवान शिव के स्वरबद्ध तरीके से चौपाइयों का गायन कर रहे हैं। समूचा तुलसी नगरी उत्साह से भर गई है लेकिन कोविड -19 कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण बड़े ही सादगी के साथ सन्त , महात्माओं व कुछ श्रद्धालुओं के बीच तुलसी महोत्सव चल रहा है। तुलसी जन्मकुटीर के पुजारी विष्णुकान्त चतुर्वेदी ने श्रद्धा व भाव से श्रीराचरितमानस की आरती व पूजन किया।
इस वर्ष तुलसी जयन्ती महोत्सवमें कोविड -19 कोरोना वायरस के कारण महोत्सव में गिने – चुने लोग ही शामिल होंगे। नवान्हपारायण के पहले दिन माँ यमुना की पूजा – अर्चना के बाद कलश पूजन किया गया तथा वृन्दावन के सन्त रामदास जी महाराज ने श्रीरामचरितमानस महाग्रंथ को अपने सिर पर रखकर नगर के राधाकृष्ण गुर्रा मन्दिर , ऐतिहासिक हनुमान मन्दिर तक पैदल चलकर मन्दिरों में पूजा – अर्चना किया।
इस मौके पर सूर्यप्रकाश त्रिपाठी , अशोक सोनी (पप्पू) , भरतलाल जायसवाल , शिवभूषण सिंह , रामलाल सोनी आदि श्रद्धालु भक्तगण पूरे सोशल डिस्टेन्स के साथ कलश पूजन में शामिल रहे। पूजा अर्चना के बाद संत रामदास जी महाराज ने कहा कि धर्म एक ऐसा माध्यम है जो समाज को प्रेम सौहार्द के साथ जीना सिखाता है आज के समाज में भारतीय सभ्यता का लोप होता जा रहा है और पश्चात सभ्यता के कारण समाज में अनेकों प्रकार की विसंगतियां पैदा हो रही हैं इन विसंगतियों को दूर करने के लिए आज हर अभिभावक का दायित्व बनता है की आने वाली पीढ़ी को नैतिक शिक्षा देकर समाज को आगे बढ़ाने का काम करे ।