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जय गुरु देव

प्रेस नोट
29.09.2021
मुंबई, महाराष्ट्र

संयम नियम से न रहने की वजह से बढ़ रहे हैं रोग – बाबा उमाकान्त जी महाराज

गृहस्थ आश्रम में सुख, समृद्धि और बरकत लाने का सीधा सरल उपाय बताने वाले उज्जैन के संत बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 26 सितंबर 2021 को मुम्बई आश्रम में दिए व यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर प्रसारित संदेश में बताया कि यह मनुष्य शरीर उस मालिक की दया से थोड़े समय के लिए मिला हैं। वह जब चाहे इसको खाली करा लेगा। इस समय पर घर से आदमी निकले तो कोई गारंटी नहीं है कि 2 घंटे बाद ठीक-ठाक घर वापस आ जाएंगे।

यह देहिया पर गर्व न कीजै, चार स्वान गिरि खाइए, मन पक्षी उड़ जाहिए।

मनुष्य शरीर को पिंजरा बताया गया। इसी पिंजरे में आत्मा बंद है। चाहे पिंजरा सोने का ही हो, जब तोता उड़ जाता है तो उसकी कीमत नहीं रहती। तोता रहेगा तो रोज सफाई करोगे, रोज देख-रेख करोगे। दरवाजे के सामने लोग लटका देते हैं कि कोई कुत्ता बिल्ली हमला न कर दें। ऐसे ही यह शरीर पिंजरा है इस की रखवाली करो।

कम खाओ, गम खाओ- ये है जीवन जीने का सूत्र

खाओ लेकिन उतना जिससे शरीर चलता फिरता रहें, स्वस्थ रहें, जितना हजम हो सके, रोग न होने पावे कि शरीर को काटना-पीटना पड़े, शरीर की नसें काटने पड़ जाएं और शरीर और रोगी हो जाए। इस शरीर के अंदर जो मनुष्य का भोजन है केवल वह ही डालो। मनुष्य का भोजन है जड़ वस्तुएं, साग-सब्जी, अनाज, फल-फूल, दूध, घी, मेवा-मिष्ठान। इसको इसमें डालो। मुर्दा-मांस मत डालो। इनसे बना खून बेमेल हो जाएगा, बीमारियां बढ़ जाएंगी। कितना भी दवा करावोगे लेकिन तकलीफ नहीं जाएंगी। खून बेमेल होने का उपाय लोग जान नहीं पाएंगे कि इसको शुद्ध कैसे किया जाए। बस दवा खिलाते रहेंगे। एक दवा खाएंगे दूसरा रोग पैदा हो जाएगा।

सत्संग न मिलने के कारण लोग संयम-नियम भूल गये है

रोग तो लोग जान करके पैदा कर लेते हैं। मन नहीं मानता है, खाते-दबाते चले जाते हैं। मालूम है कि यह चीज नुकसान करेगी लेकिन मानते नहीं हैं।
मौसम के बदलाव से भी रोग हो जाता है जैसे जुकाम हो गया, ज्यादा गर्मी बढ़ गई तो दस्त। बुढ़ापे में भी रोग होता है। शरीर कमजोर हो जाते हैं। एक होता है संयम-नियम से न रहा जाए। थोड़ी सी लापरवाही हो जाए की तकलीफ होती ही है। आजकल तो जवान लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, ग्लूकोस चढ़ रहा है, ऑपरेशन हो रहा है। कोई संयम नियम नहीं। संयम नियम जरूरी है। शरीर के लिए खाओ लेकिन हिसाब से खाओ। सीख लो क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए। सत्संग में यह बातें बहुत बताई गई।

संयम में यही है कि ताकत को अपने बचा करके रखो, मनोरंजन का साधन न बनाया जाये

संयम-नियम का पालन करो। संयम यही है जब भूख लगे तब खाओ। ताकत को अपने बचाकर के रखो। बच्चा पैदा करने के हिसाब से ही काम करो। यह ध्यान रहे कि मनोरंजन का साधन न बना लिया जाए।

मनुष्य से ज्यादा जानवर करते है संयम-नियम का पालन

देखो जानवरों में भी संयम नियम होता है। कुत्ते में देखो, खा-पीकर के आया है और उसके सामने रोटी डाल दो तो सूंघ करके छोड़ देगा। लेकिन आदमी पसंद की चीज खूब पेट भरके आया है, उसके सामने रसगुल्ला रख दो तो उसका मन मानेगा नहीं। कोई अगर कह देगा ले लो तो मन मानेगा नहीं। क्वार महीना जब आता है कुत्तों का, तब पगलाते हैं, इधर-उधर भटकते हैं। बाकी 11 महीना संयम से रहता है तो संयम-नियम का पालन करो।