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सरगुजा जिले के अंतर्गत एक शिक्षक द्वारा ऐसी तस्वीर देखी गई जिसे देखकर कलेक्टर सरगुजा को संज्ञान मे लेकर शिक्षक को शिक्षा सिखाऐ लंबे अर्से से अंगद के पांव की तरह जमे शिक्षक ने शिक्षा जगत को किया शर्मसार

ब्यूरो रिपोर्ट पंकज शुक्ला

अंबिकापुर। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान को लागू करते हुए उसकी सफलता के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। ऐसा पहली पहली बार हुआ है कि हाई स्कूल / हायर सेकेंडरी स्कूलों को संकुल केंद्र बनाया गया है और प्राचार्यों को संकुल प्राचार्य बनाया गया है। इस व्यवस्था के यह उम्मीद की जा रही है कि इससे सिस्टम में कसावट आएगी, किंतु सिस्टम में लंबे अर्से से अंगद के पांव की तरह अब भी कुछ ऐसे नकारा संकुल समन्वयक भी जमे हुए हैं जो सरकार के किए कराए पर पानी फेरने को तैयार बैठे नजर आ रहे हैं। कल यानि 24 सितंबर को सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड के संकुल केंद्र पोंडी खुर्द में जय तिवारी नाम के संकुल समन्वयक का एक ऐसा ही नजारा देखने को मिला जिससे सारे शिक्षा जगत को शर्मसार होना पड़ रहा है और उनके कर्तव्यपरायणता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है । कल संकुल कार्यालय में इस संकुल समन्वयक के इर्द गिर्द कुछ शिक्षक बैठे हुए थे और ये श्रीमान अपने दोनो पैर टेबल पर रखकर गप्प मारने में इतने मशगूल थे कि उन्हें ये भी पता नही चला कि किसी मीडिया कर्मी ने ऐसा करते उनकी फोटो कब ले ली।
संकुल समन्वयक का पद अत्यंत महत्वपूर्ण एवम जिम्मेदारीपूर्ण होता है।संकुल के शिक्षको के लिए उसका आचरण अनुकरणीय होता है। लेकिन जय तिवारी द्वारा जो आचरण प्रस्तुत किया जा रहा है उसकी सर्वत्र थू – थू हो रही है। संकुल के शिक्षक भी उनसे संतुष्ट नहीं हैं और उनके लिए फेंकू और डिंगबाज़ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किसी विषय की जानकारी ने होने के बावजूद अध्यापनरत शिक्षको को इनके द्वारा अनावश्यक रूप से टोका टोकी की जाती है। लेकिन इन्होंने अपना दबदबा ऐसा बनाकर रखा है कि कोई शिक्षक इनके सामने अपना मुंह नही खोल पाता और कुढ़ कर रह जाता है। किसी प्रकार की कोई काबिलियत न रहने के बावजूद अपने आप सबसे सुपर साबित करने के चक्कर में शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है। ऑफिस में बैठे उनके चित्र को देखकर कोई भी व्यक्ति यह सहज ही अनुमान लगा सकता है कि वे किस श्रेणी के संकुल समन्वयक हो सकते हैं। जिन्हे अपने ऑफिस में बैठने तक का तौर -तरीका तक पता नहीं है वे अपने कर्तव्यों पर कितना खरा उतर पाते होंगे ,यह विचारणीय प्रश्न है।
जय तिवारी जैसे शिक्षक शिक्षा जगत के लिए किसी कोढ़ की तरह हैं। जिस शिक्षक में संस्कार नाम की कोई चीज नही है वह बच्चों को क्या सिखाता होगा? तकनीकी त्रुटियों की वजह से धोखे से शिक्षक बने ऐसे शिक्षकों के लिए सबसे पहले संस्कारवान बनने के लिए प्रशिक्षण आयोजित की जानी चाहिए ,साथ ही विभाग के अधिकारियों को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि इस तरह के महत्वपूर्ण पदों तक हल्के व्यक्तित्व वाला कोई शिक्षक न पहुंच पाए।