गऊ माता की जान बचाओ उन्हें भूखे ना मरने दो- परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज

गऊ माता की जान बचाओ उन्हें भूखे ना मरने दो-
परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज
आश्रम उज्जैन(म.प्र.)भारत
विश्व कल्याण और जीव रक्षा का ध्येय रखने वाले उज्जैन के पूज्य संत बाबा उमाकान्त जी महाराज ने अपने भक्तों से आह्वान करते हुए आदेश दिया कि गऊ माता की रक्षा करने के लिए आप आगे आओ जिन गऊ शालाओ में गऊ माता के लिए भोजन की ठीक से व्यवस्था नही है वहाँ आप गऊ माता के चारे की व्यवस्था करने का अभियान चलाओ मां दूध पिलाती है और एक दूध पिलाने वाली कौन मां होती है वह है गऊ माता कहां गया जैसे मां की सेवा की जाती है ऐसे ही गऊ की सेवा करनी चाहिए प्रेमियों अब तो गाय पालना लोग बंद कर दिए पहले तो दरवाजे दरवाजे पर गाय हुआ करती थी बहुत सी बीमारियां उनकी जो गंध निकलती थी शरीर से श्वांश लेती उनकी गोबर से उनकी मूत्र से बहुत सी बीमारियां निकल जाती थी अब तो लेकिन आज तो सब लोग नहीं पाल सकते आज के मशीन के युग में दौड़-धूप के युग में जनसंख्या बढ़ने के कारण सब लोग अपने अपने घर में नहीं पाल सकते हैं तो जगह जगह पर ऐसी व्यवस्था बना लिया व्यक्तिगत लोगों ने कुछ सरकारों ने की गऊशाला खुलवा दी तो अब गऊशाला तो खुल गई अब किस भाव से लोगों ने खोला दूध पीने के भाव से दूध बांटने के भाव से सरकार से अनुदान लेने के भाव से कुछ भी तरीके से हम तो इसका विश्लेषण नहीं करना चाहते और हम उधर नहीं जाना चाहते हैं लेकिन यह जरूर कहना चाहते हैं जिन गऊशालो में हालत खराब है गऊओं की उनको चारा नहीं मिल पा रहा है और वह किसी तरह से जी रहे हैं उन गऊशालाओं में आप चारा दे दो एक अभियान यह चला दो कहते हैं कि पहले खुद करो फिर दूसरे के कहने के हकदार बनोगे सबसे पहले जब लॉकडाउन लगा था यही से घोषणा हुई थी इतने लाख भोजन यहां से दिया जाएगा खिलाया जाएगा प्रेमी जगह-जगह खिलाने लग गए सरकार खिलाने लग गई जगह-जगह पर संस्थाएं खिलाने लग गई तो हम कहने के हकदार भी हुए जो हमने खुद किया तो हमने कहा आश्रम के प्रेमियों से गऊशालाओं में भूसा डलवाना शुरू कर दो तो डालना शुरू हो गया अब देख लो समझ लो कि जो गऊशालाये कमजोर हैं जहां पर जरूरत है भूसा की चारा की सहयोग इकट्ठा करके आप वहां डलवा दो रोज-रोज बनाकर वहां नहीं खिलाना है ना रोज-रोज आप उनकी सेवा करने जा सकते हो सेवा करने की व्यवस्था तो उन लोगों ने बना रखा है सरकार भी अन्नदान देती है उनको पैसा मिलता है तो वह उनको कुछ देते हैं उनसे गोबर उठाते हैं सफाई कराते हैं और उनको घास चारा खिलाने के लिए तो चल तो सब रहा है कहीं-कहीं चारा आदि की दिक्कत है वह कमजोर हैं
देखो जानवर रखो तो उनकी सेवा करो कमजोर नहीं होना चाहिए आदमी पाल तो लेता है कुत्ता बिल्ली उन पर ध्यान नहीं देता उन पर ध्यान दो समय-समय पर जैसे अपने बच्चे को खिलाते हो परिवार वालों को खिलाते हो रोटी देते हो ऐसे उन का भी ध्यान रखना चाहिए तो किन परिस्थितियों में वह ध्यान नहीं दे पा रहे हैं उस पर तो आपको जाना नहीं है जहां भी देखो कमजोर गाय हैं जानवर हैं आप संगत के जो लोग हो चाहे जिस गांव में हो गाय शहर में हो मोहल्ले में हो और आप नामदानी हो वहां पर सत्संगी हो तो आप मिलकर के सब लोग चारा डलवा दो गऊओं को भी अब खिलाओ अब उनको भी भूखे मत मरने दो प्रेमियों इन सब का आप लोगों को लाभ मिल जाएगा फल मिल जाएगा अब आप करके देखो करोगे नहीं हिम्मत नहीं करोगे आगे नहीं बढ़ोगे तो कैसे मंजिल तक पहुंच पाओगे तो जो भी बातें बताई जाए उनको पकड़ो समझो विचार करो और उस पर अमल करो