श्रावस्ती के जंगलों पर वन माफियाओं का काला साया,

यूपी फाइट टाइम्स

श्रावस्ती के जंगलों में बेश कीमती लकड़ियों के साथ साथ औषधियों की बड़ी खान है जिसपर वन माफियाओं के साथ वन विभाग की नज़रे जमी रहती है जिसके चलते श्रावस्ती के जंगलों ने चटियल मैदान का रूप ले लिया है।क्यो की वन विभाग की मिली भगत से यँहा रातों रात जंगल की बेश कीमती लकड़ी काट कर उसकी तस्करी कर दी जाती है।जी हाँ मामला श्रावस्ती के जंगल से जुड़ा है जहाँ वन विभाग के आला अधिकारियों की मिली भगत से रातों रात जंगल की बेश कीमती लकड़ियां वन माफियाओं की भेंट चढ़ रही है जिसका जीता जागता उदाहरण ककरदरी वन रेंज के परसा डेहरिया का है जहाँ रातों रात सागवान के 80 पेड़ वन विभाग की मिली भगत से वन माफियाओं ने काट कर एक आम की बाग में लगा दिये गामीणों ने जब ये देखा तो उन्होंने इसकी सूचना DFO को दी तो DFO ने ग्रामीणों को ये कहकर भगा दिया कि ये लकड़ी परमिट की है और अगर ज़्यादा बवाल किया तो लकड़ी चोरी के केस में फंसा देंगे।लेकिन जिस परमिट का हवाला DFO साहब दे रहे है उस परमिट की समाप्ति की तारीख 28/8/2019 है जिसे समाप्त हुये 1 वर्ष हो गये है जब कि वन दरोगा की रिपोर्ट के अनुसार 21/8/2019 को ही पेड़ लोड हो चुके है।तो आखिर ये पेड़ कँहा से आये जिसे DFO परमिट की लकड़ी बता रहे है जब मीडिया ने इस मामले पर DFO से बात करनी चाही हो उन्होंने मीडिया से मिलने से मना कर दिया जिससे साफ जाहिर होता है कि कंही ना कंही वन विभाग श्रावस्ती के जंगलों को समाप्त करने का प्रण कर चुका है।