विश्व के 80% लोगों पर जीव हत्या का पाप परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज

जयगुरुदेव
प्रेस नोट
21।11।2020
विश्व के 80% लोगों पर जीव हत्या का पाप
परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज

उज्जैन के पूज्य संत बाबा उमाकान्त जी महाराज ने भक्तो को सन्त, महात्माओं की महिमा बताते हुए संदेश दिया कि जब संत आए तो संतों ने इधर का सब खत्म कर दिया क्योंकि इधर बहुत टाइम लगता है मन को रोकने में समय लगता है उनको याद करने में उनको पुकारने में मन को विषय वासनाओं से हटाने में समय लगता है और आप देखो इस समय पर घोर कलयुग चल रहा है आप यह समझो इस समय पर पूरे विश्व मे 80%से ज्यादा लोगों के ऊपर जीव हत्या का पाप लगा हुआ है,अच्छा काम जो करता है उसे पुण्य मिलता है बुरा काम जो करता है उसके ऊपर पांप लगता है,अब आप देखो धाराएं यहां बनी हुई हैं यहां का कानून बना हुआ है क्या बना हुआ है की जो हत्या करता है उसको भी पाप लगता है, जो बंदूक देता है हत्या के लिए उसको भी सजा मिलती है यह सब सजा के भागी हो जाते हैं चाहे जान में हो रहे हैं चाहे अनजान में हो रहे हैं ।
कोई जान करके किसी को मरवा देता है वह भी हत्या का भागीदार हो जाता है और मरवाने वाले के साथ में जो रहता है वह भी उस कानून के दायरे में आ जाता है तो आप यह समझ लो यह बहुत गहन विषय है इसको प्रेमियों आप को समझने की जरूरत है कि जीवो को जो मारता है काटता है लाता है खाता है खिलाता है और जो उसका साथ करता है उसके साथ जुड़ा हुआ है उसके बर्तन में बनाया गया है उसको खुशी होती है कि हम दावत दे रहे हैं बुला रहे हैं इनको ये आ रहे हैं हमारे यहाँ यह सब हत्या के भागीदार बन जाते हैं मांस खाना बहुत बड़ा पांप बताया गया जो कहते हैं मांस खाओगे शरीर बन जाएगा तंदुरुस्त हो जाओगे बहुत से अज्ञानी डॉक्टर हैं जिन को नहीं पता है नहीं जानकारी है कहते हैं कि अंडा खाओगे ताकत आ जाएगी शरीर बन जाएगा अब शरीर तो सूखी रोटी खाने से भी चल सकता है इसमें भी ताकत रहती है जो शरीर सादा खाना खाने से शाकाहारी खाने से चलता रहता है उससे ज्यादा जब ताकत में आ जाती है तब मन किधर ले जाता है विषयों की तरफ ले जाता है जो मांसाहारी हैं मांस जब खाने लगे ताकत जब बढ़ने लगी आप समझो मांस पकने में जब दिक्कत हुई क्योंकि मांस गलता नहीं है अब रोटी डाल दो पानी में थोड़ी थोड़ी देर बाद आप देखो घुल जाएगी लेकिन मांस जल्दी घुलता नहीं है जो अधपका हुआ मांस भी अंदर चला जाता है पेट में जब चला जाता है तो घुलने में दिक्कत होती है तो जल्दी पचता नहीं है तो उसको पचाने के लिए शराब पीने लगे मांस को गलाने के लिए मांस को शरीर के अंदर पचाने के लिए अब जब शरीर के अंदर शराब गई, तो बुद्धि खराब हो गई कि जो अलग ताकत मिली मांस खाने से शरीर को जब ताकत मिली बुद्धि खराब हुई तो आदमी अपनी नियत को खराब कर लिया तो दूसरों की औरतों की तरफ नजर चली गई बाजार के औरतों की तरफ चली गयी वहां पर अपने जो कीमती सात्विक शुक्राणु थे उनको उधर फैला दिया और मांसाहारी शुक्राणु को अपनी औरत को उससे बच्चा बना तो वह जो शुक्राणु सारे के सारे उसी बच्चे के शरीर में फैल गए जो उस तरह के थे आप यह समझो जो ऐसा भाव रखते हैं एक कोई अच्छा संतान पैदा हो जाए ध्रुव जैसा पैदा हो जाए भरत जैसा पैदा हो जाए भक्त प्रल्हाद जैसा पैदा हो जाए राम जैसा पैदा हो जाए रहीम जैसा पैदा हो जाए मोहम्मद साहब जैसा पैदा हो जाए कृष्ण जैसा पैदा हो जाए भगत सिंह चंद्रशेखर अशफाक उल्ला खान महात्मा गांधी जैसा पैदा हो जाए तो इसके भाव जिसके रहते हैं उसी तरह से उसके बच्चे पैदा होते हैं कामवासना बस बच्चे को पैदा करते हैं तो उनके बच्चे उसी तरह से व्यभिचारी प्रवत्ति के पैदा होते हैं मनुष्य जो है पशुओं से बत्तर जिसको कहते हैं वो हो गया मतलब पशुओं से भी एक तरह से नीच प्रवत्ति में चला गया आप समझो कि ऐसे समय में अध्यात्म और धर्म-कर्म लोगों के समझ में क्या आ सकता है वह तो बस वही पसंद करेंगे भगवान का नाम ले लो पूजा पाठ जैसे लोग करते हैं ऐसे कर लो। इसलिए महाराज जी ने सभी से शाकाहारी,सदाचारी,नशामुक्त जीवन जीने का आह्वान किया।