बरेली में वरिष्ठ भाजपा नेता पं.पुरूषोत्तम शर्मा जी का हृदय गति रुकने से आकस्मिक निधन।

बरेली में वरिष्ठ भाजपा नेता पं.पुरूषोत्तम शर्मा जी का हृदय गति रुकने से आकस्मिक निधन।

रिपोर्ट-सूरज सागर बरेली

बरेली। प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कर्मठ स्वयंसेवक रहे 83 वर्षीय पंडित पुरुषोत्तम शर्मा जी का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। बीते शनिवार 15 अगस्त को कैलाश गिरी घाट पर पौत्र प्रतीक दीक्षित ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। पुरूषोत्तम शर्मा जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रचारक रहे व जनसंघ पार्टी से लेकर भारतीय जनता पार्टी के कर्मठ जुझारू कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं समाज के प्रत्येक कार्य में उनकी सहभागिता बढ़-चढ़कर रहा करती थी। समाज के शोषित वर्ग की समस्याओं के समाधान में लगे रहते थे। पूर्व मंत्री एवं विधायक धर्मपाल सिंह ने अंतिम यात्रा में भाजपा का झंडा उड़ाकर सम्मान के साथ विदाई दी और कहा कि ऐसे सामाजिक व्यक्ति के चले जाने से समाज और पार्टी दोनों ही को बहुत क्षति हुई है।

डॉ.गोविंद दीक्षित ने बताया कि अद्भुत जिजीविषा व जिगीषा के धनी श्रद्धेय ताऊजी दिवंगत।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता आदरणीय ताऊजी पंडित पुरुषोत्तम शर्मा जी 16 वर्ष की अवस्था में सन् 1952 ई० में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े तो आजीवन स्वयंसेवक बने रहे । राजनीति में कदम रखा तो जनसंघ से जुड़े जनसंघ का विलय जब जनता पार्टी में हुआ तो वे जनता पार्टी के हो गए, जनता पार्टी जब भारतीय जनता पार्टी में परिवर्तित हुई तो वे भी भारतीय जनता पार्टी के सिपाही हो गए।
इस बीच न जाने कितने सगे संबंधी लोकसभा या विधानसभा के चुनाव में विभिन्न पार्टियों के प्रत्याशी बनकर उनके पास आशीर्वाद माँगने आए तो उनका एक ही उत्तर होता था….आपको आशीर्वाद ,आपके बच्चों को आशीर्वाद, आपके परिवार को आशीर्वाद, आपके इष्ट मित्रों को आशीर्वाद किंतु आपकी पार्टी को विजय का आशीर्वाद नहीं। मैं भारतीय जनता पार्टी का सिपाही हूँ और उस पार्टी के अतिरिक्त किसी अन्य पार्टी के विषय में सोच भी नहीं सकता।
एक बार परिवारीजन ने उन्हें छेड़ने की दृष्टि से कहा कि एक बार किसी अन्य पार्टी को भी आजमा कर देखा जाए तो वे नाराज हो गये और एक ही बात कही अगर किसी के मन में यह विचार भी है तो यह ध्यान रखना इस विचार को धरातल पर लाने के लिए उसे मेरी लाश से होकर जाना होगा, जब तक मैं जिंदा हूँ तब तक मेरे परिवार से किसी भी व्यक्ति का एक भी वोट किसी अन्य पार्टी को नहीं जाना चाहिए।
फिर सब निरुत्तर …..

वर्ष 1972 से 1982 तक पुरुषोत्तम शर्मा जी ग्राम शिवपुरी के प्रधान रहे तदुपरांत जिला पंचायत सदस्य रहे। सन् 2005 से 2010 तक पुनः ग्राम शिवपुरी के प्रधान निर्वाचित हुए। राजनीति मे आजीवन सक्रिय रहे ताऊ जी का जीवन अत्यन्त वेदनाओं से परिपूर्ण रहा।
30 जनवरी सन् 1991 को उनके एकमात्र पुत्र भारतीय जनता पार्टी के तेजतर्रार युवा नेता हमारे बड़े भाई श्री राकेश दीक्षित जी का एक सड़क दुर्घटना में असामयिक देहावसान हो गया। इस घटना से वे काफी हद तक टूट गए और हृदयरोगी हो गए किन्तु लगभग ढाई माह बाद जब घर में नवजात पौत्र(स्व० राकेश दीक्षित जी का बेटा) प्रतीक दीक्षित की किलकारी गूँजी तो मानो जीने का संबल मिल गया। उसको दुलारते-सम्हालते फिर समाज सेवा में जुट गए, किन्तु फिर एक आघात … पुत्र वियोग से विकल हमारी आदरणीया ताई जी भी सन् 2000 में आपको अकेला कर गोलोकवासी हो गयीं।
पौत्र प्रतीक दीक्षित (जो साक्षात् बड़े भाई स्व० राकेश दीक्षित की ही अनुकृति है) आपकी सेवा पुत्र से भी बढ़कर कर रहा था, इसी बीच एक दुर्घटना और हुई सन् 2017 में आपकी पुत्रवधू हमारी आदरेया भाभी जी श्रीमती रेखा दीक्षित भी स्वर्ग सिधार गयीं।
विशाल घर में दो ही जन बचे, बाबा-पोता।
जैसे-तैसे पुनः खुदको सम्हाला और सन् 2018 में पौत्र का विवाह धूमधाम से किया।
वही ताऊ जी, बीते दिनांक 14/08/2020 को घर में पौत्र,पौत्रवधू व लगभग 4 माह की प्यारी-सी प्रपौत्री को छोड़कर दिवंगत हो गए।
ताऊ जी सदैव कहते थे, बस एक ही इच्छा है मेरा शरीर भारतीय जनता पार्टी के ध्वज में लिपट कर शमशान भूमि तक जाए।
तो संयोग देखिए उनके परलोक गमन का समाचार सुनते ही दिल्ली के बीच रास्ते से ही वापस लौट आये उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री/आँवला विधायक मा० श्री धर्मपाल सिंह जी ने आज आदरणीय ताऊ जी के पार्थिव शरीर को, अपने साथ लाये भारतीय जनता पार्टी के ध्वज से आच्छादित किया और उनकी अर्थी को कंधा देकर नम आँखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। मुखाग्नि से पूर्व मा० मंत्री जी ने उस ध्वज को बड़े आदर के साथ पार्थिव शरीर से उतारा और सहेजकर अपने पास रख लिया।धर्मपाल सिंह जी प्रातःकाल से सायंकाल तक पूरे दिन हमारे यहाँ रहे और शोक संतप्त पूरे परिवार को सान्त्वना भी दी किन्तु दीक्षित परिवार ही नहीं पूरे क्षेत्र की जो क्षति हुई है वह सर्वथा अपूर्णनीय है।