जनप्रतिनिधियों को प्रतिनिधि रखने का नहीं है कोई प्राविधान – लक्ष्मी प्रसाद वर्मा (पूर्व विधायक सपा)

व्यूरोचीफ बालकृष्ण विश्वकर्मा

चित्रकूट / राजापुर – भारतीय लोकतंत्र में संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार हर पांच वर्ष में जनता के द्वारा जनप्रतिनिधियों पर चुनाव होता है और वह जनप्रतिनिधि जीतकर क्षेत्र की जनता को गुमराह करने के उद्देश्य से अपना एक प्रतिनिधि बनाकर जनता से कोसों दूर हो जाते हैं। जबकि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के अन्तर्गत प्रतिनिधि बनाने का कोई भी कानून भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा नहीं बनाया गया।
पूर्व विधायक लक्ष्मीप्रसाद वर्मा ने बताया कि विधानसभा नियमावली नगर पालिका एक्ट तथा साँसदों को प्रतिनिधि नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं है। यदि सरकार द्वारा प्रतिनिधि नियुक्त करने का नियम होता तो प्रतिनिधि विधानसभा , लोकसभा, नगर निगम , नगर पालिका , नगर पंचायत के मीटिंगों में जाने का अधिकार क्यों नहीं दिया गया। वर्मा ने बताया कि विधानसभा सचिव , लोकसभा सचिव , नगर निकाय निदेशालय को पत्र लिखकर प्रतिनिधि नियुक्त करने का शासनादेश की माँग किया है। क्योंकि नेताओं के प्रतिनिधि डीएम , एसपी तथा विकास कार्यों की समीक्षा बैठक एवं जिला कार्य योजना की मीटिंग में जाते हैं और अधिकारी उन्हें मान्यता देकर मीटिंग में सम्मिलित होने की इजाजत भी दी जाती है। शासन सत्ता का धौंस दिखाकर अपने को प्रतिनिधि मानकर जनता से ठगी करते हैं और प्रशासन भी लाचार नजर आता है।