रामचरित मानस के चौपाइयों से गूंजा तुलसी नगरी राजापुर

व्यूरो चीफ बालकृष्ण विश्वकर्मा

चित्रकूट राजापुर – महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि राजापुर में चल रहे श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण के छठवें दिन कस्बे के विभिन्न मोहल्लों तथा घर – घर मानस की चौपाइयाँ गूँज रही हैं।
यमुना तट तुलसी जन्मकुटीर में गत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी तुलसी जयन्ती से पूर्व लगातार 9 दिनों तक मानस की चौपाइयाँ श्रद्धा व विश्वास के साथ हर घर में पढ़ी जा रही हैं। वंशीवट ओम नमः शिवाय गौशाला वृन्दावन मथुरा के सन्त रामदास जी महाराज तुलसी जन्मकुटीर में सन्त महात्माओं व श्रद्धालुओं के साथ स्वरबद्ध तरीके से नवान्हपारायण पाठ कर रहे हैं। कोविड – 19 कोरोना वायरस महामारी के चलते नगरवासी तथा ग्रामीण अँचलों के श्रद्धालु अपने – अपने घरों में नवान्हपारायण पाठ कर रहे हैं। पिछले वर्ष तुलसी जयन्ती में श्रद्धालु नर – नारियों का तुलसी जन्मकुटीर में काफी जमावड़ा लगता था लेकिन महामारी के चलते कुछ ही लोग तुलसी जन्मकुटीर में पहुँचते हैं। वंशीवट वृन्दावन के सन्त रामदास जी महाराज ने कहा कि आज का समाज भारतीय सभ्यता एवं गुरुकुल की नैतिक शिक्षा को भूलकर पाश्चात सभ्यता को अपनाकर समाज को दुसंगतियाँ दे रहा है। श्रीराचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने भारतीय समाज को भगवान श्रीराम की लीलाओं के माध्यम से शिक्षा एवं दिशा – निर्देश दिए थे। श्रीरामचरितमानस एक ऐसा ग्रन्थ है जिसमें बैर होने के बावजूद भी ब्राम्हण रावण को कई बार सन्धि करने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन अहंकार में मदचूर रावण ने सन्धि को ठुकरा दिया था। इस ग्रन्थ में पारिवारिक प्रेम , माता – पिता की आज्ञा , राजनीति , कूटनीति तथा विदेश नीति का समावेश है। श्रीरामचरितमानस को पढ़ने और सुनने से मोक्ष प्राप्त होता है।