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जय गुरु देव

26.09.2021
प्रेस नोट
वडोदरा, गुजरात

आगे बहुत खराब समय आ रहा है, उसमें जयगुरुदेव नाम मददगार सिद्ध होगा

जयगुरुदेव जयगुरुदेव जयगुरुदेव जय जयगुरुदेव नाम ध्वनि बराबर बोलने से फायदा दिखने लगेगा

इस समय कुदरती कहर से जीवो की रक्षा के लिए दिन-रात अथक परिश्रम करने वाले तथा उससे बचने के उपाय बताने वाले उज्जैन के पूज्य सन्त बाबा उमाकांत जी महाराज ने 14 सितंबर 2021 बड़ोदरा गुजरात में सतसंग सुनाते हुए बताया कि आखरी वक्त पर देखो मुंह से नाम नहीं निकलता है लेकिन जयगुरुदेव नाम जो उस मालिक, प्रभू, भगवान का जगाया हुआ नाम है, गुरु का नाम है, जो गुरु देने वाले हैं सब कुछ और हमेशा इस धरती पर रहे, उनका नाम है। आखरी वक्त पर अगर आप उन्हीं को याद कर लो तो गुरु समरथ हैं, आपके मददगार हो जाएंगे। नहीं कुछ होगा तो जो आखरी समय पर अकथनीय पीड़ा-दर्द होता है, उसी में राहत मिल जाएगी, प्राण आराम से तो निकल जाएंगे। इसलिए आदत डालो जयगुरुदेव नाम बोलने की। बराबर आदत डालो जयगुरुदेव नाम ध्वनि करने की। बच्चियों चालू करा दो। अपने-अपने घरों में। फिर पड़ोसी फिर रिश्तेदारों के यहां शुरू कर दो। समय आगे का अच्छा नहीं है। बार-बार दोहराना ठीक नहीं रहता है। बहुत खराब समय आ रहा है। ऐसे समय में यह जय गुरु देव नाम मददगार सिद्ध होगा।

जयगुरुदेव नाम मुसीबत में हर तरह से मददगार नाम है। एक बार आजमाइश करके जरूर देखें

जयगुरुदेव नाम गुरु महाराज जी ने जगाया। जब नाम का स्मरण करना बताया, नामदान दिया। सभी संतो ने यही नाम बताया जो गुरु महाराज ने नामदान दिया। अभी जो बताया जा रहा है प्रेमियों यह जयगुरुदेव नाम, इसलिए कि इसकी आजमाइश करें, इससे लोग फायदा उठा लें, विश्वास हो लोगों को कि भाई जयगुरुदेव नाम बताने वाले नुकसान नहीं करेंगे। जब आदमी को विश्वास हो जाता है तो जैसे कोई एक खुराक दवा खाया विश्वास हो जाता है कि इस दवा से हमारा फायदा होगा, रोग चला जाएगा, कमजोरी दूर हो जाएगी, विश्वास हो जाता है। ऐसे ही जयगुरुदेव नाम है। इससे लोगों को विश्वास होने लगता है। जब आप बताओगे नहीं, यह कहोगे नहीं कि भाई मुसीबत में आप बोलोगे तो मदद मिलेगी, जब हर तरफ से निराश हो जाओ, मुसीबत कोई आवे तब जयगुरुदेव नाम बोलो, उससे तुमको फायदा-लाभ मिलेगा। कैसे बोलेगा ये भी बताने की जरूरत है।

घर-घर में लड़ाई-झगड़ा, भूत-प्रेत बाधा, कमाई में बरकत नहीं तो जयगुरुदेव नाम ध्वनि बोलने से फायदा दिखेगा

देखो घर-घर में लड़ाई-झगड़ा, रुपया-पैसा कमाते हैं लेकिन बरकत नहीं हो रही, तमाम टेंशन-झंझट गृहस्त आश्रम में देखने को मिलता है।
बताओ कि जयगुरुदेव नाम की ध्वनि एक घंटा सुबह-शाम बोलना शुरू कर दे। बोल करके देखो। अंदर में ही बोल करके घर से निकले। कोई कैसा भी हो जब वह बोलने लगेगा तो सफाई तब ही होगी। बताओगे नहीं तो कैसे बोलेंगे, कैसे उनको फायदा दिखाई पड़ेगा? तो सबसे पहला पाठ जयगुरुदेव नाम की ध्वनि के बारे में बताना है सब लोगों को।

गुरु महाराज के जाने के बाद लाखों लोगों को नाम दान मिला, करने की जरूरत है

ऐसे ही आ जाते हैं। सब सतसंगों में सुनते भी हैं, नामदान भी लेते हैं फिर वही घर-गृहस्थी में फंस जाते हैं लेकिन करते नहीं हैं। तो उसका फायदा लोगों को नहीं मिल पाता है। करोड़ों लोगों को गुरु महाराज ने नामदान दिया। उनके जाने के बाद लाखों लोगों को नामदान दिया गया लेकिन सब थोड़ी न करते हैं। क्यों नहीं करते हैं? क्योंकि आदत बनी हुई है गंदगी इकठ्ठा करने वाली। तो गंदगी जब इकट्ठा हो जाती है, सफाई उसकी नहीं होती है तब वैसे का वैसे रह जाते हैं।

जीवात्मा के ऊपर चढ़ी गंदगी की जयगुरुदेव नाम ध्वनि सफाई करेगी

जैसे लोहा के ऊपर जंग लगा हुआ है। पारस पत्थर का गुण क्या है? पारस पत्थर लोहा से छुआ दो तो सोना बन जाता है लेकिन अगर लोहे पर गंदगी लगी है तो कितना भी बढ़िया पारस पत्थर हो लेकिन उसको जब तुम छुवाओगे तो लोहा सोना नहीं बनेगा। आपको बड़े उदाहरण देकर बता दूं। जो बड़े चुंबक होते हैं, छोटे चुम्बक को खींचते हैं। लेकिन चुंबक अंदर तो है लेकिन ऊपर से आप उसके गंदगी कर दो तो उसको नहीं खींचेगा। ऐसे ही जीवात्मा के ऊपर जब गंदगी आ जाती है तो यह नाम जो बताया जाता है, यह उसको खींचकर के ऊपर ले जाता है। इसलिए जयगुरुदेव नाम से ही सफाई कराओ, इसी से धुलाई कराओ।

जयगुरुदेव नाम की ध्वनि अपने-अपने घरों में सब लोग शुरू कर दो

बच्चों! झाड़ू लगाते हो घर में फिर भी गंदगी इकट्ठा हो जाती। ऐसे ही गंदगी कर लेते हो। सुमिरन तो करते हो, ध्यान तो थोड़ी देर लगाते हो लेकिन घर से जब बाहर निकलते हो तो देखने-सुनने से गंदगी आ जाती है। तो उसकी सफाई जयगुरुदेव नाम से होती है। जब तक अपने-अपने घरों में बच्चियों जयगुरुदेव नाम की ध्वनि शुरू नहीं करोगे तब तक आपकी बातों का असर नहीं पड़ेगा। जब भोजन बनाकर के जयगुरुदेव नाम की ध्वनि बोलकर अपने बच्चों को नहीं खिलाओगे तब तक उसका असर नहीं पड़ेगा। कोई सत्संगी आ गया, मेहमान आ गया, आपने उसको बताया कि जयगुरुदेव नाम बोल करके प्रसाद बना करके खाओ और आपने नहीं बोला, उसको खिला दिया, वह तो समझेगा हाथी का दांत खाने का अलग है और दिखाने का अलग है।