प्रेमियों की साधना क्यों नही बनती? -बाबा उमाकान्त जी महाराज

जयगुरुदेव

उज्जैन मध्य प्रदेश

प्रेमियों की साधना क्यों नही बनती? -बाबा उमाकान्त जी महाराज

विश्व विख्यात परम् सन्त बाबा जयगुरुदेव महाराज जी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी पूज्य सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने अपने उज्जैन आश्रम से 12 सितम्बर 2020 को भक्तों को सन्देश देते हुये बताया कि प्रेमियों आपका ध्यान भजन क्यों नहीं बनता है? अंतर में कुछ दिखाई सुनाई क्यों नहीं देता है? साधना क्यों नही बनती है? इसका क्या कारण है? देखो आदमी की जिस चीज की आदत बन जाती है वह जल्दी नहीं छूटती है। बहुत से लोग सत्संगी प्रचार-प्रसार भी करते हैं, सतसंगों में आते हैं, बराबर सत्संग सुनते हैं, सत्संग की बातों को, याद की हुई बातों को लोगों को बताते हैं, उपदेश भी करते हैं लेकिन खुद उस पर नहीं चलते हैं और न परिवार वालों को चला पाते हैं।
उसी पत्थर पानी में अब भी फंसे हुए हैं जिसमें पूर्वज लोग फंसे हुए थे। जिससे उनके अंदर-बाहर धार्मिक भावना जगी, नदियों में स्नान करने से, तीर्थों में जाने से, प्रवचन सुनने से संस्कार बना। उसका संस्कार सत्संगियो के ऊपर पड़ा और सत्संगियो के संस्कार जब अच्छे बने तो उनको गुरु मिल गए, नाम दान ले लिया। नामदान मिल गया लेकिन तो भी उसको नहीं छोड़ पा रहे हैं, मन बराबर उधर लगा हुआ है।

एक म्यान में दो तलवार कैसे रह सकती है? आज भी कितने सत्संगियों के यहां होती है मूर्तियों की पूजा

आज सत्संगियों के यहां, कितनों के यहां मूर्तियां बनाकर के पूजा हो रही हैं। घर वालों को कभी समझाएं यह नाराज हो जाएंगे, लड़का नाराज हो जाएगा। पंजीरी नहीं बनी, फलाहार नहीं बना, झांकी नहीं सजाई गई, कृष्ण को झूला डाल कर के झूलाया नहीं गया। कभी असली चीज जानते हुए भी आप बताएं तो मन कहां लगा हुआ है? उधर ही लगा हुआ है।

परमात्मा गुरु रूप में सर्वत्र है, विद्धमान है। उनको जब भूलकर दुनिया की चीजों में फंसे रहोगे तो कैसे बनेगी साधना

मन किधर लग जाता है? जिधर और लोगों का मन लगा हुआ है। लोग कर्जा अदा करने के लिए परिवार वाले जुड़े हुए हैं। सोचते हैं यह नाराज हो जाएंगे तो रोटी-पानी नहीं देंगे। उस मालिक को भी भूल जाते हैं जो पैदा होने के पहले मां के स्तन में दूध भर देता है, परवरिश तो करता है, देता वह है, खिलाता वह है। तो उसको जब भूलते हो और कहते हो ध्यान-भजन नहीं बन रहा है, कुछ नंतर में दिखाई सुनाई नहीं पड़ रहा है तो आप खुद निर्णय ले लो। एक म्यान में क्या दो तलवार रह सकती हैं? कभी भी नहीं।

।।जयगुरुदेव।।
परम सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज आश्रम उज्जैन (म.प्र) भारत